जिलेवार ख़बरें

धान खरीदी से पहले गिरदावरी पर विवाद तेज, पटवारियों के बाद कृषि कर्मचारियों ने भी दी हड़ताल की चेतावनी

बलौदा बाजार.

छत्तीसगढ़ में फसल गिरदावरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पटवारी संघ के पीवी एप (फसल भौतिक सत्यापन) के जरिए गिरदावरी का काम करने से इनकार करने और हड़ताल पर जाने के बाद अब कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों ने भी इस काम का विरोध शुरू कर दिया है।

शासन ने कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को फील्ड में जाकर पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी करने की जिम्मेदारी दी है। इसके विरोध में बलौदाबाजार में कृषि विभाग के कर्मचारियों ने कलेक्टर और उप संचालक कृषि को ज्ञापन सौंपकर उन्हें इस काम से मुक्त रखने की मांग की है। कृषि विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि गिरदावरी राजस्व विभाग से जुड़ा काम है और उन्हें इसका पर्याप्त अनुभव नहीं है। ऐसे में फसल सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड में गलतियां होने की आशंका है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है और उन्हें धान बेचने के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कर्मचारियों ने मांग की है कि गिरदावरी का काम उन लोगों से कराया जाए, जिन्हें राजस्व संबंधी कार्यों का अनुभव है।

मांग नहीं मानी तो हड़ताल पर जाने की चेतावनी
छत्तीसगढ़ कृषि अधिकारी शासकीय संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र टंडन ने कहा कि राजस्व पटवारी संघ पीवी एप से गिरदावरी कराने का विरोध कर रहा है और उसके हड़ताल पर जाने के बाद शासन ने यह जिम्मेदारी कृषि विभाग को सौंपने का फैसला लिया है। कृषि विभाग के कर्मचारियों को खेती-किसानी से जुड़े काम का अनुभव है, लेकिन राजस्व संबंधी रिकॉर्ड और गिरदावरी की प्रक्रिया का पर्याप्त अनुभव नहीं है। टंडन के मुताबिक, कर्मचारियों से यह काम कराने पर गलतियां होने की आशंका है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ सकता है और धान खरीदी के दौरान उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि गिरदावरी का काम ऐसे सर्वेयर से कराया जाना चाहिए, जिन्हें इस प्रक्रिया का अनुभव हो। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर कलेक्टर और उप संचालक कृषि को ज्ञापन सौंपा है। यदि शासन की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो कृषि विभाग के कर्मचारी भी हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं।

एक दिन का अवकाश लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे कर्मचारी
अपनी मांगों के समर्थन में जिलेभर से कृषि विभाग के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी एक दिन का अवकाश लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने ज्ञापन सौंपकर पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी का काम कराने के फैसले पर विरोध जताया।

नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की उम्मीद
गिरदावरी का काम धान खरीदी से जुड़ा होने के कारण इस विवाद का असर किसानों पर पड़ने की आशंका है। नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में पटवारी संघ के विरोध के बाद कृषि विभाग के कर्मचारियों की आपत्ति ने शासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि शासन कृषि कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और गिरदावरी का काम समय पर पूरा कराने के लिए क्या व्यवस्था करता है। किसानों के लिए यह प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी है, ताकि धान बेचने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

धान उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में है छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक और उपार्जन करने वाले राज्यों में शामिल है। खरीफ सीजन के लिए प्रदेश में 27 लाख से अधिक किसान सरकारी पोर्टलों पर पंजीकृत हैं। पिछले खरीफ विपणन सत्र में राज्य सरकार ने 14 नवंबर से धान खरीदी शुरू की थी। इस दौरान प्रदेश के उपार्जन केंद्रों में 25 लाख से अधिक किसानों से समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड 145 लाख टन से ज्यादा धान खरीदा गया था। इस बार भी बड़ी संख्या में पंजीकृत किसानों और धान के रकबे को देखते हुए खरीदी की तैयारी समय पर पूरी करना और उपार्जन केंद्रों को निर्धारित समय पर शुरू करना जरूरी है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button