राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

चीन से तनाव के बीच ITBP की बड़ी तैयारी, LAC पर जवानों की तैनाती तेज करने के लिए खरीदे जाएंगे 24 वाहन

 नई दिल्ली
एक तरफ अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) अपनी ऑपरेशनल क्षमता को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है. दुर्गम पहाड़ों में जवानों की तेज आवाजाही से लेकर ड्रोन वॉरफेयर, एंटी-ड्रोन सिस्टम, विशेष कमांडो ट्रेनिंग और भूमिगत बंकरों तक, सीमा सुरक्षा की रणनीति में व्यापक बदलाव की तैयारी है. इसी कड़ी में करीब दो दर्जन क्विक रिस्पांस फाइटिंग व्हीकल (QRFV) खरीदने की योजना अहम मानी जा रही है। 

भारत-चीन सीमा पर चुनौती केवल दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने तक सीमित नहीं है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई हिस्सों में ऊंचे पहाड़, बेहद कम तापमान, बर्फ से ढके रास्ते और सीमित सड़क संपर्क सुरक्षा बलों के सामने अलग तरह की चुनौतियां पैदा करते हैं। 

ऐसे हालात में किसी संवेदनशील स्थान पर अचानक तनाव बढ़ने पर जवानों को कितनी तेजी से वहां पहुंचाया जा सकता है, यह सुरक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है.अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आई फेस-ऑफ की स्थितियों के बीच ITBP की वाहन क्षमता और आधुनिक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल जवानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित, संगठित और प्रभावी तरीके से तैनात करने की क्षमता बढ़ाना। 

1. करीब दो दर्जन QRFV से मजबूत होगी त्वरित कार्रवाई की क्षमता
ITBP की योजना करीब दो दर्जन क्विक रिस्पांस फाइटिंग व्हीकल खरीदने की है. इन वाहनों का मकसद संवेदनशील परिस्थितियों में जवानों की आवाजाही और त्वरित तैनाती की क्षमता बढ़ाना है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) पहले से ही सीमा के निकट सैनिकों की आवाजाही के लिए बेहतर सड़क नेटवर्क और आधुनिक वाहनों का इस्तेमाल करती है. ऐसे में भारतीय पक्ष के लिए भी मजबूत मोबिलिटी एक अहम जरूरत है। 

QRFV यानी Quick Response Fighting Vehicle का मूल उद्देश्य है कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बल कम समय में निर्धारित स्थान तक पहुंच सकें. सामान्य परिवहन वाहन और इस तरह के विशेष सैन्य वाहन के बीच बड़ा अंतर उनकी सुरक्षा, कठिन भूभाग में संचालन और ऑपरेशनल परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन में होता है.यहां सबसे महत्वपूर्ण पहलू है रिएक्शन टाइम यानी प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय. सीमा पर तनाव की स्थिति में बेहतर सड़क संपर्क, उपलब्ध वाहन और प्रशिक्षित जवान मिलकर त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ाते हैं. अगर किसी स्थान पर आमने-सामने की स्थिति बनती है, तो वहां तक अतिरिक्त बल पहुंचाने की क्षमता हालात को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

2. चीन की चुनौती और भारत की बदलती रणनीति
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है.इसको लेकर कई बार दोनों देशों के बीच बैठकें  भी हो चुकीं है.जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सीमा पर किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए केवल पारंपरिक गश्त पर्याप्त नहीं है. बेहतर बुनियादी ढांचा, संचार, निगरानी और तेजी से बल तैनात करने की क्षमता भी जरूरी है। 

अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच फेस-ऑफ की स्थिति सामने आने के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों को कितनी तेजी से सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है.ITBP भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करने वाला प्रमुख बल है। 

इसका दायित्व ऐसे इलाकों में गश्त करना, सीमा पर निगरानी रखना और प्रतिकूल परिस्थितियों में चौकियों की सुरक्षा करना है, जहां ऊंचाई और मौसम दोनों बड़ी चुनौतियां हैं.QRFV जैसी गाड़ियों की खरीद इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है. इसका उद्देश्य केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जवानों की सुरक्षित आवाजाही और कठिन परिस्थितियों में कार्रवाई की क्षमता को बेहतर बनाना है। 

3. पहाड़ों में गाड़ी चलाना ही सबसे बड़ी चुनौती
मैदानी इलाकों में किसी स्थान तक पहुंचने और ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचने के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है. पहाड़ों में संकरी सड़कें, तीखे मोड़, ढलान, भूस्खलन, बर्फबारी और कम तापमान वाहनों की परिचालन क्षमता को प्रभावित करते हैं.कई सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क सीमित है. कुछ जगहों पर अंतिम चौकी तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. मौसम खराब होने पर यात्रा का समय और बढ़ सकता है। 

ऐसे में ITBP के लिए केवल अधिक वाहन खरीदना पर्याप्त नहीं होगा. वाहनों का पहाड़ी भूभाग के अनुकूल होना, नियमित रखरखाव, चालकों का विशेष प्रशिक्षण और ईंधन तथा स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी जरूरी होगी.QRFV जैसी गाड़ियों से मिलने वाला वास्तविक लाभ इसी बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें किन इलाकों में तैनात किया जाता है और वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उनकी क्षमता कितनी प्रभावी रहती है। 

4. बख्तरबंद वाहनों की खासियत क्या होती है?
क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल श्रेणी के कई आधुनिक सैन्य वाहनों में सुरक्षा और गतिशीलता को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार किया जाता है. वाहन के मॉडल के आधार पर इनमें बख्तरबंद बॉडी, चार पहियों से चलने वाली ड्राइव प्रणाली, विशेष टायर और कठिन परिस्थितियों में संचालन की सुविधाएं हो सकती हैं। 

कुछ बख्तरबंद वाहनों में गोलीबारी और विस्फोट से सुरक्षा देने वाली संरचना भी होती है. कुछ में भीतर बैठे जवानों को सुरक्षा के साथ जवाबी कार्रवाई करने में मदद देने वाली सुविधाएं दी जाती हैं. लेकिन इन क्षमताओं का स्तर हर मॉडल में अलग होता है.यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि QRFV एक व्यापक श्रेणी का नाम भी है। 

भारतीय सेना के लिए विकसित किसी खास वाहन की सीटिंग क्षमता, इंजन की शक्ति, ऊंचाई पर संचालन की सीमा या सुरक्षा स्तर को ITBP की प्रस्तावित खरीद पर स्वतः लागू नहीं किया जा सकता.ITBP के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरत ऐसी गाड़ियों की होगी, जो उसके परिचालन क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुकूल हों और जरूरत पड़ने पर जवानों को तेजी से उनके निर्धारित स्थान तक पहुंचा सकें। 

 

5. ड्रोन से लेकर एंटी-ड्रोन सिस्टम तक, ITBP का आधुनिकीकरण
वाहनों की खरीद ITBP की व्यापक आधुनिकीकरण योजना का केवल एक हिस्सा है. बल की तैयारियों में ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और सीमा पर बेहतर सुरक्षा ढांचे पर भी जोर दिया जा रहा है.ITBP के महानिदेशक आईपीएस शत्रुजीत कपूर ने हाल में बल के आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण से जुड़ी कई योजनाओं का उल्लेख किया है. 2027 के अंत तक पूरे बल को STRIKE ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। 

अब तक करीब 10 हजार जवानों को यह प्रशिक्षण दिया जा चुका है और इसके लिए 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं.इस पहल का मकसद जवानों को बदलती परिचालन चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है. सीमा पर आमने-सामने की स्थिति में संयम, अनुशासन, शारीरिक तैयारी और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। 

इसके साथ ही प्रत्येक बॉर्डर गार्डिंग बटालियन में ड्रोन प्लाटून स्थापित करने की योजना भी अहम है. ड्रोन का इस्तेमाल क्षेत्र की निगरानी, दुर्गम स्थानों की जानकारी जुटाने और ऐसी परिस्थितियों का आकलन करने में किया जा सकता है, जहां जमीन पर मौजूद जवानों के लिए पहुंचना कठिन होता है.हालांकि, ड्रोन निगरानी का विकल्प हैं, जवानों और जमीनी सुरक्षा व्यवस्था का विकल्प नहीं। 

6. 400 करोड़ के बजट में ड्रोन तकनीक पर विशेष जोर
ITBP के आधुनिकीकरण से जुड़ी योजनाओं में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक को विशेष महत्व दिया जा रहा है.उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण बजट का 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों पर खर्च करने का प्रस्ताव है. इसके अतिरिक्त, लगभग 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की व्यापक आधुनिकीकरण योजना और ड्रोन वॉरफेयर के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव का भी उल्लेख किया गया है। 

इन आंकड़ों को अलग-अलग बजटीय मदों और प्रस्तावों के रूप में समझना जरूरी है. इन्हें एक ही स्वीकृत और खर्च हो चुकी राशि मानना सही नहीं होगा. अंतिम आवंटन, मंजूरी और खरीद की स्थिति संबंधित आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी। 

ड्रोन तकनीक का बढ़ता महत्व इस बात से भी जुड़ा है कि आधुनिक सीमा सुरक्षा अब केवल जमीन पर तैनात जवानों और चौकियों पर निर्भर नहीं रह सकती. हवाई निगरानी और तकनीकी उपकरण सुरक्षा बलों को व्यापक क्षेत्र की स्थिति समझने में मदद कर सकते हैं.ITBP ने ड्रोन निर्माण की इन-हाउस क्षमता विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं. यदि यह क्षमता बढ़ती है, तो जरूरत के अनुरूप उपकरण तैयार करने और बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है। 

7. भूमिगत बंकर और सुरक्षित आश्रय स्थलों की तैयारी
सीमा पर जवानों की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी ITBP की प्राथमिकताओं में शामिल है. इसमें भूमिगत बंकर और सुरक्षित आश्रय स्थल बनाने की योजना विशेष महत्व रखती है.उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अगले तीन वर्षों में जमीन के ऊपर और नीचे आश्रय स्थलों की क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जवानों को प्रतिकूल मौसम और संभावित सुरक्षा खतरों से बेहतर सुरक्षा मिल सके। 

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आश्रय स्थल केवल आराम करने की जगह नहीं होते. वे जवानों को अत्यधिक ठंड से बचाने, जरूरी सामान सुरक्षित रखने और लंबे समय तक दुर्गम इलाकों में तैनाती बनाए रखने में मदद करते हैं. ITBP के ठंडे क्षेत्रों में स्थित 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेट किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। 

इंसुलेशन से अंदर का तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है और जवानों को कठोर मौसम में रहने की बेहतर सुविधा मिल सकती है.इस तरह वाहनों, बंकरों और आधुनिक उपकरणों की योजनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. वाहन जवानों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाते हैं, जबकि सुरक्षित आश्रय और बेहतर बुनियादी ढांचा उन्हें वहां लंबे समय तक प्रभावी ढंग से तैनात रहने में मदद करते हैं। 

8. QRFV, ड्रोन और प्रशिक्षण: तीनों का तालमेल क्यों जरूरी?
सीमा सुरक्षा की नई रणनीति को केवल किसी एक उपकरण की खरीद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. किसी भी आधुनिक सुरक्षा बल की क्षमता कई तत्वों के तालमेल से बनती है। 

    पहला तत्व है गतिशीलता. QRFV जैसे वाहन जवानों की आवाजाही और त्वरित तैनाती को बेहतर बना सकते हैं.
    दूसरा तत्व है निगरानी. ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरण दुर्गम क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने में मदद कर सकते हैं.
    तीसरा तत्व है प्रशिक्षण. कठिन परिस्थितियों में जवानों को अनुशासित, समन्वित और प्रभावी तरीके से काम करने के लिए प्रशिक्षित होना पड़ता है.
    इनके साथ चौकियों, संचार व्यवस्था, चिकित्सा सहायता और रसद की उपलब्धता भी जरूरी है. यदि किसी क्षेत्र में वाहन पहुंच तो जाएं, लेकिन संचार या जरूरी आपूर्ति की व्यवस्था कमजोर हो, तो उनकी उपयोगिता सीमित हो सकती है। 

इसीलिए ITBP का आधुनिकीकरण केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है. यह सीमा पर तैनात जवानों की पूरी परिचालन व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़ा विषय है। 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button