राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

भागलपुर में मिलावट की जांच पर संकट, चालक के अभाव में फूड सेफ्टी वाहन का संचालन प्रभावित

भागलपुर
 जिले के लोगों को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए करीब छह साल पहले उपलब्ध कराया गया फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन अब चालक के अभाव में परेशानी का सामना कर रहा है।

श्रावणी मेला समेत महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की जांच के लिए मुख्यालय से इस वाहन के इस्तेमाल का निर्देश दिया जाता है।

वाहन के लिए तकनीशियन की व्यवस्था है, लेकिन चालक के सेवानिवृत्त होने से इसके नियमित संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच प्रभावित होने की आशंका है।

संविदा पर चालक की नियुक्ति के लिए निकला विज्ञापन
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने बताया कि वाहन चालक के सेवानिवृत्त होने से संचालन में परेशानी हो रही है। हालांकि, सरकार की ओर से संविदा पर चालक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया है। चालक की नियुक्ति होने के बाद वाहन का नियमित संचालन आसान हो सकेगा।

सप्ताह में दो दिन जांच का निर्देश
खाद्य निरीक्षक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि मुख्यालय से इस वाहन के माध्यम से सप्ताह में दो दिन खाद्य पदार्थों की जांच करने का निर्देश है। चालक नहीं रहने से इसमें परेशानी आ रही है।

जब तक नए चालक की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उपलब्ध संसाधनों के आधार पर काम करने का प्रयास किया जाएगा। अशोक कुमार सिन्हा के पास भागलपुर के साथ मुंगेर जिले का भी प्रभार है।

मौके पर होती है सामान्य जांच, रासायनिक जांच पटना में
फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन में उपलब्ध प्रयोगशाला से खाद्य पदार्थों की सामान्य जांच की जाती है। राजहंस कुमार ने बताया कि वाहन से सभी तरह की जांच संभव नहीं है।

मौके पर मिठाई में फफूंद, असामान्य गंध और खराब होने के अन्य लक्षणों की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर रासायनिक जांच के लिए पटना भेजा जाता है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।

अगस्त से अब तक आधा दर्जन दुकानदारों पर कार्रवाई
राजहंस कुमार के अनुसार, अगस्त से अब तक जिले में करीब आधा दर्जन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान विभिन्न इलाकों में खराब खाद्य पदार्थ बेचने के मामले सामने आए।

खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि होने पर नियमानुसार मामला आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। मामले की प्रकृति और मिलावट की गंभीरता के आधार पर सक्षम प्राधिकारी जुर्माना लगा सकते हैं।

गंभीर मामलों में न्यायालय की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है। नियमों के तहत खाद्य कारोबार का लाइसेंस निलंबित या रद करने की कार्रवाई भी हो सकती है।

पनीर में फॉर्मलिन मिलाने की आशंका
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने बताया कि जांच के दौरान पनीर में मिलावट का मामला सामने आया है।

उनके अनुसार, कुछ दुकानदार पनीर को अधिक दिनों तक खराब होने से बचाने के लिए फॉर्मलिन समेत अन्य रसायनों का इस्तेमाल करते हैं।

इससे पनीर सामान्य परिस्थितियों में जितने समय तक सुरक्षित रह सकता है, उससे अधिक समय तक खराब होने के लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते। हालांकि, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही की जा सकती है।

फॉर्मलिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके संपर्क या सेवन से गंभीर नुकसान हो सकता है। ऐसे रसायनों का खाद्य पदार्थों में अवैध इस्तेमाल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है।

इसके अलावा मिठाइयों में अनधिकृत रंगों के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए भी नमूने लिए जाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि नियमानुसार नमूने लेकर जांच कराई जाती है और गड़बड़ी की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाती है।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button