राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ’ स्थापित करने को योगी कैबिनेट की मंजूरी

राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 'भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ' स्थापित करने को योगी कैबिनेट की मंजूरी

– पांच वर्षों के लिए मिलेगा अधिकतम दो करोड़ रुपये का अनुदान, भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध को मिलेगा बढ़ावा

– राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा संस्थागत आधार

लखनऊ,
 योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 'भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ' स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। साथ ही योजना के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों को भी स्वीकृति दी गई। इस निर्णय का उद्देश्य भारत की समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत को उच्च शिक्षा से जोड़ते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रवर्तकों एवं ज्ञान-विज्ञान के महान चिंतकों के विचारों के अध्ययन, अनुसंधान और प्रसार को बढ़ावा देना है।

योजना के अन्तर्गत 50 वर्ष या उससे अधिक पुराने तथा 5,000 से अधिक छात्र संख्या वाले राज्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा के महान प्रवर्तकों के नाम पर शोधपीठ स्थापित की जाएंगी। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक में 5 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इन शोधपीठों के माध्यम से महान भारतीय आचार्यों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और चिंतकों के योगदान का अनुसंधान, अभिलेखीकरण तथा व्यापक प्रसार किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों में तार्किकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा वैश्विक उपयोगिता के प्रति जागरूकता विकसित की जाएगी।

लोक भवन के मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया है। इसी के अनुरूप शोधपीठों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा, पर्यावरणीय ज्ञान, कृषि परंपराओं, सांस्कृतिक अध्ययन तथा भारतीय ज्ञान की अन्य विधाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण और अनुसंधान किया जाएगा, ताकि इनका लाभ समाज तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि शोधपीठ किसी विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालय के विभाग, केंद्र अथवा संकाय में सामान्यतः पांच वर्षों के लिए स्थापित की जाएगी तथा इस अवधि के बाद समीक्षा के आधार पर इसके विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक शोधपीठ की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा पांच वर्षों हेतु अधिकतम दो करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। यह राशि सावधि बचत खाते में जमा की जाएगी तथा उससे प्राप्त ब्याज का उपयोग शोधपीठ के संचालन और उसकी निरंतरता बनाए रखने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर), दान तथा अन्य स्रोतों से भी अनुदान प्राप्त किया जा सकेगा, जिसे उसी सावधि बचत खाते में जमा किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी और भारतीय ज्ञान-विज्ञान को वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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