RO.NO.12784/141
राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

खंडवा में 16 साल पहले अबू फैजल ने किया था आतंक का बीजारोपण, मशहूर होने के लिए चुनी आतंक की राह

RO.NO.12784/141

खंडवा
सिमी का गढ़ रहे खंडवा का आतंक से पुराना नाता है। 16 साल पहले एटीएस जवान सीताराम यादव सहित तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर आतंक का बीजारोपण अबु फैजल ने किया गया था। अब एक बार फिर खंडवा की जमीन से इस प्रकार के मॉड्यूल को अपना कर आतंक का परचम लहराने की कोशिश हो रही है। 32 वर्षीय अब्दुल रकीब के बाद 36 वर्षीय फैजल शेख की फितरत एटीएस की नजरों से बच नहीं सकी। अपने आतंकी मंसूबों को अंजाम देने से पहले ही एसटीएफ और मध्य प्रदेश एटीएस ने उन्हें धरदबोचा। एक साल पहले खंडवा से अब्दुल रकबी पुत्र अब्दुल वकील कुरैशी भी इंटरनेट के माध्यम से बम बनाने की ट्र्रेनिंग देने और पश्चिम बंगाल की आंतकी घटना को अंजाम देने वालों के संपर्क में होने से पकड़ा गया था। उसे पश्चिम बंगाल की एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। फैजल भी उसका साथी होने से एनआईए, एसएफटी और एटीएस के राडार पर था। जांच ऐजेंसी को पुख्ता सबूत हाथ लगते ही उसे खंडवा से गिरफ्तार कर लिया गया। इंटरनेट के जरिए आतंक को जिंदा रखने का प्रयास खंडवा में 28 नवंबर 2009 को तिहरे हत्याकांड को प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के गुर्गों ने अंजाम दिया था। इनका सरगना मुंबई का डॉ. अबू फैजल था।

उत्तर प्रदेश का रहने वाला था अबू फैजल
मूलत: उत्तर प्रदेश का रहने वाला अबू फैजल खंडवा में अपना आतंकी साम्राज्य खड़ा करना चाहता था, इसके लिए निमाड़ और मालवा में इस्लामिक आंतकवाद का जहर फैलाने के लिए युवा को जोड़ने की कोशिश की। इसमें कुछ हद तक वह सफल भी हुआ, लेकिन जांच एजेंसियों और पुलिस की कोशिशों से सिमी सहित अन्य आंतकी संगठन खंडवा में अपनी जड़ें नहीं जमा सके। सिमी गुर्गों की गिरफ्तारी के बाद जमीनी गतिविधियों पर लगाम लग गई, लेकिन इंटरनेट के जरिए युवाओं में इस्लामिक कट्टरवाद और नफरत का जहर भर कर आतंक को कायम रखने के प्रयास जारी है। इसके परिणाम स्वरूप यहां रकीब और फैजल जैसे युवा भटक कर आतंक की राह अख्तियार कर रहे है। आतंकी अबू फैजल और यासीन भटकल से प्रभावित होकर खंडवा का युवा फैजल हनीफ शेख विध्वंस और दहशत के जरिए स्वयं को अन्य युवाओं का रोल मॉडल व हीरो बनने की कोशिश में लगा था। वह अपने मंसूबों में सफल हो पाता इससे पहले एटीएस भाेपाल की टीम ने उसे धरदबोचा।

एक अक्टूबर 2013 को जेल से भागे थे सिमी आंतकी
स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया संगठन को 2001 में आतंकी गतिविधियों के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था। खंडवा में तिहरे हत्याकांड के बाद सातों सिमी आतंकी जिला जेल से 1 अक्टूबर 2013 को भाग निकले थे। इनमें मुंबई निवासी आबू फैजल, खंडवा के गणेश तलाई का अमजद खान,असलम, जाकिर हुसैन, मेहबूब उर्फ गुड्डू और करेली निवासी एजाजउद्दीन पर हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में एक सहयोगी आबिद अंसारी जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद थे। खंडवा जेल से भागने के 3 साल बाद इन्हें एटीएस ने गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भोपाल में रखा था। 31 अक्टूबर 2016 को शेख मुजीब, असलम, हबीब उर्फ शेट्टी, साजिद उर्फ शेरू, अबु फैजल, महबूब, एजाजुद्दीन और इकरार शेख भोपाल जेल से भागने में कामयाब हो गए थे।इस दौरान एनकाउंटर में सिमी के 7 आतंकी मारे गए थे। इनमें अबु फैजल बच गया था। भोपाल सेंट्रल जेल में पहले से सजा काट रहे आतंकी अबू फैजल को दिसंबर 2023 में एनआइए कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा वर्ष 2013 में खंडवा जेल तोड़ने के मामले में सुनाई गई थी।

मशहूर होने के लिए चुनी आतंक की राह
जिहादी मानसिकता ने एक बार फिर खंडवा को शर्मसार कर दिया। मशहूर होने के चक्कर मे आतंकी संगठनों के संपर्क में आकर फैजान देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहता था, लेकिन एटीएस की कार्रवाई ने आतंकी के मंसूबों को नाकाम करते हुए उसे दबोच लिया।

Dinesh Purwar

Editor, Pramodan News

RO.NO.12784/141

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button