श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस पर शोध कार्य को भारत सरकार से मिला पेटेंट

भिलाई-स्थानीय श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के लाइफ साइंस विभाग की प्राध्यापक डॉ निहारिका देवांगन एवं डॉ श्वेता गायकवाड़ ने एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग एवं उसके हानिकारक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस डिटेक्शन किट को बनाया है,जिसका भारत सरकार के पेटेंट विभाग ने पेटेंट प्रमाण पत्र जारी किया है।
अपने शोध कार्य पर प्रकाश डालते हुए डॉ निहारिका देवांगन ने बताया कि इन्फेक्शन से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है।ये इन्फेक्शन दो प्रकार के होते हैं पहला बैक्टिरियल और दूसरा वायरल।आजकल लोग हर तरह के इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक दवाओं का धड़ल्ले से उपयोग किया करते हैं और लगातार इन दवाओं के लेने से एक प्रकार का रेसिस्टेंस विकसित हो जाता है जिससे इन दवाओं का असर नहीं होता बल्कि साईड इफेक्ट हो जाता है।ज्यादा मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं लेने से कीटाणु (बैक्टीरिया) नष्ट नहीं होते और अपना काम करते रहते हैं।
डॉ स्वेता गायकवाड़ ने बताया कि सही एंटीबायोटिक का चुनाव करने के लिए कल्चर रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक दवाएं लिखते हैं।इस प्रक्रिया में समय लगता है इन्हीं सब बिंदुओं को रेखांकित करते हुए प्रयोगशाला में किट को तैयार किया गया है जो पहचान लेगा कि दवा प्रभावकारी होगी कि नहीं या कहें रेसिस्टेंस की जानकारी मिल जाएगी। इससे त्वरित उपचार में सुविधा होगी।इस किट को बनाने में शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव की प्राध्यापक डॉ सोनल मिश्रा और उनकी टीम ने संयुक्त प्रयास किया हैं। भविष्य में इसके माध्यम से नए सुविधाजनक किट तैयार हो सकेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आई.पी. मिश्रा एवम कुलपति डॉ ए.के. झा, डायरेक्टर विकास डॉ सुशील चंद्र तिवारी एवं कुलसचिव पी.के. मिश्रा ने लाइफ साइंस के प्राध्यापकों को बधाई दी है।




