राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

भारत के बाद इस देश को मिली फिर से रूसी तेल खरीदने की छूट, ट्रंप की मेहरबानी का कारण क्या?

नई दिल्ली

मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने फिलीपींस को बड़ी राहत दी है. अमेरिका ने फिलीपींस के अनुरोध पर उसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए अस्थायी छूट दे दी है. बीते हफ्ते में तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए ट्रंप ने रूसी तेल खरीद की छूट बढ़ा दी थी. इसका फायदा खुद भारत को भी हो रहा है लेकिन फिलीपिंस को और भी राहत दी गई है। 

फिलीपींस के ऊर्जा विभाग के मुताबिक, यह छूट 17 अप्रैल से 16 मई तक प्रभावी रहेगी. इससे पहले मार्च में भी अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी थी, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी. अब नई छूट मिलने से फिलीपींस को कुछ समय के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में राहत मिलेगी। 

ऊर्जा विभाग के अंडरसेक्रेटरी एलेस्सांद्रो सेल्स ने बताया कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. वहीं ऊर्जा सचिव शेरोन गैरीन ने कहा कि देश के पास फिलहाल करीब 54 दिनों का ईंधन भंडार मौजूद है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अतिरिक्त विकल्प जरूरी थे। 

तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित हुई
संघर्ष का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ा है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग पर तनाव की वजह से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसी कारण कई देशों को वैकल्पिक सोर्सेज की तलाश करनी पड़ रही है। 

तेल की कीमतों को काबू में रखने की कोशिश?
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने हाल ही में रा
ष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया था. इस कदम का मकसद देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और संभावित संकट से निपटना है। 

इस बीच फिलीपींस सरकार ने यह भी साफ किया है कि वह नए कोयला परियोजनाओं पर लगी रोक को नहीं हटाएगी. अब अमेरिका से तेल खरीद की छूट मिलने पर लोगों को और भी राहत मिलने की उम्मीद है. इसके जरिए तेल की कीमतों को काबू में रखा जा सकता है। 

साल 2020 में देश ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नई कोयला परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाया था. हालांकि 2019 से पहले मंजूरी प्राप्त परियोजनाएं आगे बढ़ सकती हैं. ऊर्जा मंत्रालय अब पुराने कोयला संयंत्रों की समीक्षा भी कर रहा है, क्योंकि लंबे समय में उनकी लागत ज्यादा है और वे भरोसेमंद भी नहीं माने जा रहे। 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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