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गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया जारी, अब तक हुआ 2 हजार 547 करोड़ रूपए की राशि भुगतान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 अप्रैल को विधानसभा में प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने के संकल्प के लिए मंत्रि-परिषद की महिला सदस्यों ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अभिनंदन किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, नगरीय‍विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी तथा पंचायत और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह ने पुष्प-गुच्छ भेंटकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया।

प्रदेश में बढ़ा गेहूं उपार्जन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया। मध्यम और बड़े किसानों को स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई। इस श्रेणी के 1 लाख 60 हजार 261 किसानों ने स्लॉट बुक किए हैं। स्लॉट बुकिंग की अवधि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। प्रदेश में अब तक कुल 9.49 लाख स्लॉट बुक हुए हैं जिनमें 4.49 लाख किसानों ने अपनी फसल बेची है। अब तक कुल 19.31 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन हो चुका है, जिसके लिए 2 हजार 547 करोड़ रूपए की राशि भुगतान की जा चुकी है। प्रत्येक शनिवार के अवकाश दिवस में भी स्लॉट बुकिंग और उपार्जन जारी रहेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 प्रति केन्द्र की गई है। किसान को तहसील के स्थान पर जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा दी गई। किसानों को राहत देते हुए एफए क्यू मापदण्ड को शिथिल करते हुए चमकविहीन गेहूं की सीमा 50% तक, सूकड़े दाने की सीमा 06% से बढ़ाकर 10% तक और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा बढ़ाकर 06% तक की गई।

जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, स्वयंसेवी संस्थायें जल संरक्षण में करें सहयोग

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 19 मार्च से प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक चलेगा। सभी जिलों में कई गतिविधियां और नवाचार हो रहें है। इसी अभियान के मध्य 25 मई को गंगा दशहरा है। इस दिन पूरे प्रदेश में एक साथ जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां वृहद स्तर पर आयोजित की जायें। अधिक से अधिक व्यक्ति अपने आस-पास की जल संरचनाओं की बेहतरी के लिए श्रमदान करें। जन-जन को जल संरचनाओं के संरक्षण से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया अभियान नगरीय एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक साथ गतिविधियां आयोजित की जायें। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, स्वयंसेवी संस्थायें, स्व-सहायता समूह, व्यापारी संगठन एवं अन्य शासकीय, अशासकीय संस्थाओं को भी जोड़ा जाये। मंत्रीगण अपने-अपने प्रभार के जिलों में अभी से ही इस कार्यक्रम की तैयारी की रूपरेखा बनाएं।

मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में नागरिकों को जनगणना में भाग लेने के लिए करें प्रोत्साहित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 26 अप्रैल को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण में भारत की जनगणना 2027 पर केन्द्रित चर्चा की। इस बार जनगणना का अनुभव अलग रहने वाला है क्योंकि यह पूरी तरह से डिजिटल है। गणना करने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप है। नागरिक खुद भी अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा जनगणना का महत्व बताते हुये जनगणना की प्रक्रिया में सभी के भाग लेने का आव्हान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से अपने-अपने क्षेत्र में नागरिकों को जनगणना के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए उन्हें प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण परिणामोन्मुख शिक्षा का मॉडल बन रहें हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य शासन की अपेक्षाओं के अनुरूप सांदीपनि विद्यालयों से बेहतर परिणाम आने लगे हैं। हाल के ही दसवी एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों में इन विद्यालयों के 58 छात्र-छात्राओं ने मेरिट में स्थान बनाया। दसवीं की मेरिट सूची में 41 विद्यार्थी सांदीपनि विद्यालयों से हैं वही बारहवीं में 17 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। विगत 4 वर्षों में सांदीपनि विद्यालयों में कक्षा दसवीं में उत्तीर्ण विद्यालयों का प्रतिशत 68 से बढ़कर 88 हो गया। कक्षा बारहवीं का परिणाम इस अवधि में बढ़कर 59 प्रतिशत से 89 प्रतिशत हो गया। सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण परिणामोन्मुख शिक्षा का मॉडल बन रहें हैं।

कान्हा में आए जंगली भैसे

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वन्य जीव संरक्षण और जैव विविधता सहयोग का नया केन्द्र बन गया है। प्रदेश में एक सदी से अधिक समय से जंगली भैस प्रजाति विलुप्त हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि आज 28 अप्रैल को कान्हा नेशनल पार्क बालाघाट के सूपखार में जंगली भैंसे का पुनर्स्थापन किया गया। चार जंगली भैंसों को उनके नये प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। यह जंगली भैंसें असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाये गये हैं। मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्य जीवों के आदान-प्रदान का नया अध्याय शुरू हो रहा है। असम से गैडें/रायनों के 2 जोड़े लाने की भी योजना है। जंगली भैंसों के आने से मध्यप्रदेश में जैव विविधता का नया आयाम जुड़ा है।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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