राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

गंगा एक्सप्रेसवे के अलावा, यूपी में बन रहे हैं 10 और सुपर हाईवे, जुड़ेंगे विंध्य, चित्रकूट और नोएडा

लखनऊ 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. हरदोई में हुए इस लोकार्पण कार्यक्रम के बाद प्रदेश में संचालित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की कुल लंबाई 1910 किलोमीटर हो गई है. यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं और प्रयागराज के बीच पहुंच काफी आसान हो गई है। 

पीएम मोदी ने इस एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के दौरान कहा कि आधुनिक प्रगति के इस दौर में उनके समीप से गुजरता यह एक्सप्रेस-वे यूपी के विकास की नई लाइफलाइन बनेगा. अब कुछ ही घंटों में आप प्रयागराज के संगम पहुंच सकते हैं और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करके वापस आ सकते हैं. इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में आगे की आने वाली एक्सप्रेस वे परियोजनाओं की भी जानकारी दे दी। 

पीएम मोदी ने भविष्य के रोडमैप का जिक्र करते हुए कहा, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे में शुमार, यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे 5 साल के भीतर बनकर तैयार हो गया है. उन्होंने कहा- एक ओर गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा हुआ है, तो इसके विस्तार पर भी काम चल रहा है. यह मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा. इसके और बेहतर उपयोग के लिए फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण करके इसे अन्य एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा। 

पीएम मोदी ने असल में बताया कि गंगा एक्सप्रेस वे के लोकार्पण के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश में 10 और एक्सप्रेस वे व लिंक एक्सप्रेस वे पर काम कर रही है. 
इसमें कई छोटी दूरी के लिंक एक्सप्रेसवे भी हैं जो बड़े और प्रमुख एक्सप्रेस वे सीधे जुड़ेंगे और सुदूर गांवों तक को एक्सप्रेस वे से कनेक्ट करेंगे। 

इन एक्सप्रेस वे के जरिए विंन्ध्याचल (मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी) को पूर्वांचल से, फर्रुखाबाद को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से, जेवर को गंगा एक्सप्रेस वे से, लखनऊ और कानपुर को आपस में कनेक्ट करते हुए और चित्रकूट को भी गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है. इसके लिए 50 किमी तक के छोटे लिंक एक्सप्रेस वे बनाए जाने पर काम हो रहा है। 

ये 10 एक्सप्रेस वे हैं, जिन पर काम जारी

विंध्य एक्सप्रेसवे – 320 किमी
मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे – 136 किमी
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे – 118 किमी

विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे – 100 किमी
फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी
जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे – 74 किमी
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे – 64 किमी
लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी
नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे – 15.17 किमी

बता दें कि उत्तर प्रदेश में अभी सात एक्सप्रेस वे ऐसे हैं जो ऑपरेशल हैं. ये एक्सप्रेस वे प्रदेश में एक छोर से दूसरे छोर तक अलग-अलग दूरियों में कनेक्टिविटी के लिहाज से सुविधाजनक बने हैं। 

यमुना एक्सप्रेसवे – 165 किमी (ग्रेटर नोएडा से आगरा)
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – 302 किमी (आगरा से लखनऊ)
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – 341 किमी (लखनऊ से गाजीपुर)
गंगा एक्सप्रेसवे – 594 किमी (मेरठ से प्रयागराज)
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – 296 किमी (चित्रकूट से इटावा)
दिल्ली-Meerut एक्सप्रेसवे – 82 किमी (दिल्ली से मेरठ)
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी (गोरखपुर से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे)

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे से कई उभरते हुए क्षेत्रों में आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है. इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी कमी आएगी, बल्कि यह माल और यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाएगा. सरकार को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को जबरदस्त बढ़ावा देगा. इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे किसानों के लिए अपनी उपज को बड़ी मंडियों तक तेजी से पहुंचाने में सहायक होगा। 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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