राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

LPG सिलेंडर की मारामारी होगी खत्म, होर्मुज से 45,000 टन गैस लेकर टैंकर हुआ रवाना

नई दिल्ली

ईरान युद्ध और होर्मुज बंद होने की वजह से देश में एलपीजी गैस की किल्लत साफ नजर आ रही है। बीते दिनों सरकार ने 5 किलो के छोटे गैस सिलेंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर पर 1 हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। लोगों को आशंका यह भी है कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। इसी बीच एक राहत की खबर भी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक सुपरटैंकर कम से कम 45000 टन एलपीजी गैस के साथ होर्मुज को क्रॉस कर रहा है। इसके भारत पहुंचने से बड़ी राहत की उम्मीद है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुपरटैंकर होर्मुज को पार कर गया है या नहीं।

जानकारी के मुताबिक सर्व शक्ति टैंकर समुद्री रास्ते से उत्तर की ओर बढ़ा है। शनिवार को यह लारक और केसम आइलैंड के पास था। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ओमान की खाड़ी से होकर यह सुपरटैंकर भारत पहुंच सकता है। बता दें कि अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान के होर्मुज को बंद रखने की वजह से इस रास्ते से टैंकर निकल नहीं पा रहे हैं। 13 अप्रैल से ही अमेरिका की नाकेबंदी जारी है।

फारस की खाड़ी में भारत के 14 जहाज
रिपोर्ट्स के मुताबिक नाकेबंदी की वजह से भारत के कम से कम 14 जहाज फारस की खाड़ी में ही रुके हुए हैं। दो जहाजों ने होर्मुज से निकलने का प्रयास किया था लेकिन उन्हें ईरान की चेतावनी के बाद वापसलौटना पड़ा। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि समुद्र में वैकल्पिक रास्ते से भी टैंकर निकल रहे हैं। ईरान से कनेक्शन वाले कम से कम 34 टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर निकल चुके हैं।

IOC है खरीदार

‘बिजनेस स्‍टैंडर्ड’ ने ‘ब्‍लूमबर्ग’ का हवाला देते हुए बताया है कि शिपिंग दस्तावेजों के अनुसार, इस कार्गो का खरीदार सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) है. हालांकि, कंपनी की तरफ से इसपर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यदि ‘सर्व शक्ति’ नाम का यह टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर लेता है, तो यह अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत से जुड़े किसी टैंकर की पहली सफल रवानगी होगी. दरअसल, अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर हालिया नाकेबंदी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. पिछले महीने एक सप्ताहांत के दौरान यह मार्ग थोड़े समय के लिए खुला था, लेकिन ईरानी सैन्य कार्रवाई के कारण इसे फिर बंद कर दिया गया. इस दौरान कई जहाजों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा. भारत (जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है) इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मध्य-पूर्व से आपूर्ति बाधित होने के कारण देश में LPG की भारी कमी हो गई है, जिससे कई जगहों पर लंबी कतारें और रसोई सेवाओं में कटौती देखने को मिली है। 

सरकार ने उठाए हैं कई कदम
इस संकट की स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं. केंद्र ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि LPG टैंकरों को प्राथमिकता दी जाए. साथ ही घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के अनुसार, देश में LPG उत्पादन को 60% बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जबकि खपत में भी 10,000 टन की कमी आई है. हालांकि, हालात तब और जटिल हो गए जब अप्रैल में ईरान ने पहले मार्ग खोलने का दावा किया, लेकिन बाद में जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं. इस दौरान ‘देश गरिमा’ नामक एक भारतीय टैंकर ने ट्रांसपोंडर बंद कर जोखिम उठाते हुए रास्ता पार किया था। 

भारत को मिली है बड़ी सफलता
बताया जा रहा है कि भारत ने अब तक कूटनीतिक बातचीत के जरिए आठ LPG टैंकरों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई है और वैकल्पिक मार्गों की भी तलाश जारी है. ‘सर्व शक्ति’ का यह सफर 10 से 14 घंटे में पूरा हो सकता है. हालांकि, क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और सुरक्षा जोखिम अब भी बने हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सर्व शक्ति’ की यह यात्रा न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। 

क्या है वैकल्पिक रास्ता
नियम के मुताबिक अमेरिका की नौसेना किसी और देश की समुद्री सीमा में किसी जहाज को नहीं रोक सकती है। ऐसे में अगर कोई जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र से होकर चाबहार बंदरगाह पहुंच जाता है और फिर दक्षिण होकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के रास्ते निकलना चाहे तो यह वैकल्पिक रास्ता हो सकता है। इस रास्ते से महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक या फिर केरल के पोर्ट पर पहुंचा जा सकता है। दूसरा रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर गुजरता है।हालांकि इसमें खतरा बहुत है।

बढ़ सकते हैं पेट्रोल डीजल के भी दाम
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और चार साल से खुदरा कीमतें स्थिर रहने से बढ़ते घाटे के बीच सरकारी सूत्रों ने निकट भविष्य में पेट्रोल एवं डीजल के दाम बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि बदले हुए हालात में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। हालांकि इसमें हल्की गिरावट आई है, फिर भी कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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