राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

राज्य आनंद संस्थान की पहल : 2160 शिक्षक होंगे आनंद सभा के प्रशिक्षक

भोपाल 

राज्य आनंद संस्थान द्वारा प्रदेश में शिक्षा को मानवीय एवं मूल्य-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत प्रदेश के शासकीय स्कूली शिक्षकों के लिये 6 दिवसीय आवासीय कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसका शुभारंभ वाल्मी, ईटीसी सेंटर नीलबड़ और राज्य आनंद संस्थान में मुख्य कार्यपालन अधिकारी  आशीष कुमार ने किया। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित होंगी, जिनमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक सहभागिता करेंगे।

राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  आशीष कुमार ने कहा कि आनंद सभा के अंतर्गत हमारा लक्ष्य है कि विद्यालयों में आनंद सभा के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन के गहरे मूल्यों से जोड़ा जाए। यह पहल शिक्षा व्यवस्था में एक सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रयास है। जब शिक्षक स्वयं इन मूल्यों को आत्मसात करेंगे, तभी वे विद्यार्थियों तक इन्हें प्रभावी ढंग से पहुँचा पाएंगे। आनंद सभा मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में एक महत्वाकांक्षी सतत प्रयास है।

राज्य आनंद संस्थान के निदेशक  सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि आनंद सभा विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास और आंतरिक आनंद का एक सशक्त माध्यम है। यह केवल शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की ओर एक यात्रा है। कार्यशालाओं के माध्यम से हम शिक्षकों को तैयार कर रहे हैं, जिससे वे विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ सकें। आनंद सभा विद्यार्थियों को केवल सफल नागरिक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

यह पहल शिक्षा प्रणाली को केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन-कौशल, आंतरिक आनंद एवं समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ने का प्रयास है। विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थी के भावी जीवन को दक्षता से जीने का आधार बनाती है। इन कार्यशालाओं में प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षक भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें विद्यालयों में आनंद सभा के संचालन के लिये तैयार करेगा। कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं। प्रत्येक कार्यशाला 6 दिन की आवासीय अवधि में होगी। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक भाग लेंगे।

प्रशिक्षण में संवाद सत्र, समूह चर्चा, समझ-सुविधा-संबंध की चर्चा, अभ्यास पुस्तिका की गतिविधियाँ और विद्यार्थियों के साथ सकारात्मक संवाद की तकनीकें शामिल होंगी।

आनंद सभा का महत्व

विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थियों को दक्षता से जीवन जीने का आधार प्रदान करती है। लेकिन शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को परिपूर्ण जीवन जीने के योग्य बनाना भी है। इसी दृष्टि से राज्य आनंद संस्थान ने आनंद सभा की परिकल्पना की है। आनंद सभा में विद्यार्थी किसी विषय की पढ़ाई नहीं करते, बल्कि जीवन कौशल और मानवीय मूल्यों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझते हैं। इसमें संवाद, सहयोग, क्षमा, कृतज्ञता, संकल्प शक्ति, समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थी केवल सफल ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त होकर परिपूर्ण जीवन जी सकें। साथ ही जीवन के विभिन्न आयामों स्वयं, परिवार, समाज एवं प्रकृति के साथ हमारे संबंधों और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलता है।

कार्यशाला के सत्रों में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर विशेष बल दिया जाता है। स्वयं और शरीर के अंतर को समझना, संबंधों में संवेदनशीलता विकसित करना, क्षमा मांगने और क्षमा करने का महत्व, कृतज्ञता का भाव, दूसरों की सहायता करने की प्रवृत्ति, तथा संकल्प शक्ति का सकारात्मक उपयोग जैसे विषयों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से सिखाया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आंतरिक परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रारंभ करना है। जब विद्यार्थी इन मूल्यों को अनुभव के स्तर पर समझने लगते हैं, तो उनका व्यवहार, दृष्टिकोण और जीवनशैली सकारात्मक रूप से परिवर्तित होने लगती है।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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