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एक लाख हेक्टेयर में धान का लक्ष्य, सरायकेला में खरीफ खेती की शुरुआत

सरायकेला

सरायकेला खरसावां जिला में रोहिणी नक्षत्र के साथ ही खेती काम शुरू हो गया है. रोहिणी के दिन किसानों ने पूजा अर्चना करते हुए खेतों की जुताई शरू कर दिया है और धान की बुआई भी शुरू कर दिया है. जिला के अधिकांश किसान छींटा विधि से ही खरीफ धान की खेती करते हैं. माना जाता है कि इस समय खेती करने से धान के पौधे रोग मुक्त रहते हैं साथ ही फसल भी अच्छी होती है.

जिला में एक लाख हेक्टेयर में धान खेती करने का है लक्ष्य
जिला में इस बार एक लाख हेक्टयर में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है इसके अलावे मूंग, उड़द, मूंगफली सहित तिलहन अन्य खरीफ खेती के लिए लक्ष्य रखा गया है. विगत वर्ष खरीफ खेती का 92 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हुई थी.

कृषि विभाग ने बीज के लिए भेजा है प्रस्ताव
जिला के किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग द्वारा बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर निदेशालय को भेजा है. बीज विनिमय वितरण और उत्पादन योजना के तहत अलग-अलग प्रकार के 700 क्विंटल धान बीज उपलब्ध कराने को कहा गया है जबकि बिरसा फसल विस्तार योजना के तहत उड़द, मूंगफली, मडुवा, अरहर, कुल्थी बीज उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भेजा गया है.

धान के इन बीजों का कृषि विभाग ने किया है डिमांड
एमटीयु1010 प्रभेद: 150 क्विंटल

एमटीयु 7029: 300 क्विंटल

आईआर64:100 क्विंटल

आईआर 64 ड़ीआरटी: 50 क्विंटल

डीआरआरएच टु :100 क्विंटल

बाजार में सजने लगी पारंपरिक हल
खेती काम शुरू होते ही कृषि उपकरणों की बिक्री शुरू हो गई है. खासकर बैलों से चलाया जाना वाला हल बाजार में 450 से 500 रुपये में बिक रही है. सरायकेला के साप्ताहिक बाजार में पारंपरिक हल को बिक्री लाया गया था. हालांकि अब हल बैल के जगह ट्रैक्टर सहित अन्य कृषि उपकरणों ने ले लिया है बावजूद भी जिला के कई किसान हल से ही अपने खेतों की जुताई करते हैं.

इस बार हो सकता है अलनिनो का असर
मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष अलनिनो का असर होने की संभावना व्यक्त किए जाने पर कृषि विभाग द्वारा तैयारी शुरू कर दिया गया है. विभाग द्वारा धान के साथ साथ मडुवा, मोटा अनाज सहित दलहन और तिलहन की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी रौशन नीलकमल ने बताया कि अलनिनो का अंदेशा पर विभाग द्वारा प्लान निदेशालय स्तर से तैयार किया गया है जिससे किसी भी परिस्थिति का सामना किया जा सके.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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