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भोपाल बना ‘वर्क इन प्रोग्रेस’ सिटी! 15 KM तक मेट्रो-फ्लाइओवर निर्माण, सड़कों पर रेंग रहे वाहन

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों बड़े बुनियादी ढांचागत विकास के दौर से गुजर रही है, लेकिन मानसून की आहट के बीच यही विकास आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। शहर में करीब 15 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो रेल, सड़कों और फ्लाइओवर का काम सक्रिय रूप से चल रहा है। इस भारी निर्माण कार्य के कारण सबसे बड़ी समस्या विभिन्न जिम्मेदार विभागों जैसे मेट्रो कॉर्पोरेशन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के बीच आपसी समन्वय की कमी के रूप में सामने आ रही है।

विभागों में आपस में मढ़ा जा रहा दोष
बीते मंगलवार को भेल क्षेत्र में लगे भीषण जाम को लेकर मेट्रो अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली। ट्रैफिक पुलिस ने जहां जाम के लिए मेट्रो निर्माण को जिम्मेदार ठहराया, वहीं एमपीएमआरसीएल के अधिकारियों ने इन आरोपों पर हैरानी जताई। मेट्रो अधिकारियों का दावा है कि वे 2 जून को लिखे पत्र और प्रशासन के साथ पूर्व में हुई बैठकों के अनुसार सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

इन प्रमुख इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर
वर्तमान में करौंद से मंडी, भदभदा से रंगमहल और रत्नगिरि से जेके रोड जैसे व्यस्त रूटों पर एलिवेटेड मेट्रो का काम चल रहा है। इसके साथ ही अयोध्या बायपास, कोलार और शाहपुरा क्षेत्रों में फ्लाइओवर और सड़कों के चौड़ीकरण का काम एक साथ चलने से पूरा शहर ट्रैफिक के मोर्चे पर ब्लॉक हो गया है। स्थानीय निवासी राजेश के मुताबिक, करौंद से ऑफिस पहुंचने में अब रोजाना 40 मिनट से ज्यादा का समय बर्बाद हो रहा है।

भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन

भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं।

सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है।

भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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