राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का उपक्रम हैं शिक्षा के मंदिर: उच्च शिक्षा मंत्री परमार

भोपाल

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को आधुनिक अधोसंरचना, अनुसंधान संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाओं से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा के मंदिर श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सशक्त उपक्रम हैं। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन के साथ चरित्र, संस्कार, कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नागरिकों का निर्माण करना है। विकसित भारत@2047 का संकल्प तभी साकार होगा, जब हमारी युवा शक्ति, भारतीय दृष्टि पर आधारित ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार एवं जीवन मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाएगी।

मंत्री  परमार शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय में उच्च शिक्षा विभाग की विश्व बैंक परियोजना अंतर्गत लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित प्राणीशास्त्र, रसायनशास्त्र, वनस्पति विज्ञान एवं भौतिकी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के लोकार्पण तथा लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली महाविद्यालय की बाउंड्रीवॉल एवं दो मुख्य प्रवेश द्वारों के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री  परमार ने कहा कि वर्ष 2047 का भारत एक विकसित राष्ट्र होने के साथ अपने पूर्वजों के ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान की विरासत के आधार पर विश्व की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाला तथा संपूर्ण विश्व के भरण-पोषण में अग्रणी भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बनेगा। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा सदैव मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती रही है और भविष्य में भी विश्व को दिशा देने का सामर्थ्य रखती है।

 परमार ने कहा कि प्रत्येक भारतीय के मन में अपने गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और विरासत के प्रति स्वाभिमान का भाव जागृत होना चाहिए। भारत ने गणित, अभियांत्रिकी, खगोल विज्ञान, आयुर्विज्ञान, कृषि, दर्शन एवं विज्ञान सहित अनेक क्षेत्रों में विश्व को अमूल्य ज्ञान प्रदान किया है। आचार्य चाणक्य और सम्राट चंद्रगुप्त का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था ने ऐसे राष्ट्र निर्माताओं का निर्माण किया, जिन्होंने विश्व इतिहास की दिशा बदल दी। आज की आवश्यकता है कि नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात करते हुए आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ आगे बढ़े।

मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत की आत्मा, संस्कृति और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की गई ऐतिहासिक शिक्षा नीति है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसी शिक्षा व्यवस्था के बल पर भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में गुणवत्ता आधारित शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उच्च शिक्षा में प्रथम वर्ष के प्रथम अध्याय में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश किया गया है।

मंत्री  परमार ने शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय को भोपाल के प्राचीनतम एवं मध्यप्रदेश के गौरवशाली शिक्षण संस्थानों में से एक बताते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय में अध्ययन करने वाले विद्यार्थी और अध्यापन करने वाले प्राध्यापक दोनों ही सौभाग्यशाली हैं। इस संस्थान ने वर्षों से प्रदेश और देश को अनेक उत्कृष्ट वैज्ञानिक, शिक्षाविद, प्रशासक और प्रतिभाशाली नागरिक प्रदान किए हैं।

मंत्री  परमार ने कहा कि बाउंड्रीवॉल एवं मुख्य प्रवेश द्वारों का निर्माण महाविद्यालय के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे परिसर की सुरक्षा और सुव्यवस्था सुदृढ़ होगी। विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को सुरक्षित, अनुशासित एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होगा तथा महाविद्यालय के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित परिसर शिक्षण, शोध एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए और अधिक अनुकूल वातावरण प्रदान करेगा।

मंत्री  परमार ने कहा कि अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाओं का लोकार्पण उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। इन प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को प्रायोगिक अध्ययन, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं शोध कार्यों के लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे उनकी वैज्ञानिक दृष्टि, शोध क्षमता एवं व्यावहारिक दक्षता का विकास होगा तथा वे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशालाएँ विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि उन्हें खोज, अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति से भी जोड़ती हैं।

मंत्री  परमार ने कहा कि महाविद्यालय प्रशासन संस्थान के विकास एवं अधोसंरचना से संबंधित आवश्यकताओं के प्रस्ताव शासन को भेजे । विद्यार्थियों के हितों से जुड़ी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता और प्रतिबद्धता है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री  परमार ने नवीन प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय परिसर स्थित विज्ञान वाटिका में पौधरोपण भी किया। विद्यार्थियों और प्राध्यापकों से आत्मीय संवाद कर उन्हें अनुसंधान, नवाचार, उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। मंत्री  परमार ने विश्वास व्यक्त किया कि शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ स्थापित कर विकसित मध्यप्रदेश एवं विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता मोदी, डॉ. अलका प्रधान, डॉ. संजय दीक्षित, डॉ. अशोक शर्मा सहित प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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