राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

उज्जैन के रामघाट पर शिप्रा आरती को लेकर बवाल: पुरोहितों को हटाया गया, महाकाल समिति के बटुकों ने संभाली कमान

उज्जैन
यहां रामघाट पर रोज होने वाली शिप्रा आरती को लेकर बवाल मच गया है। शिप्रा आरती को लेकर शुक्रवार शाम प्रशासन और तीर्थ पुरोहित आमने-सामने आ गए। करीब 11 साल से शिप्रा किनारे पूजन-पाठ कराने वाले तीर्थ पुरोहित यहां आरती कराते आ रहे हैं। अब महाकाल मंदिर समिति ने मंदिर के बटुकों को आरती की जिम्मेदारी सौंप दी है, जिसका तीर्थ पुरोहित विरोध कर रहे हैं। इसके चलते यहां विवाद बढ़ गया है।

शुक्रवार शाम महाकाल मंदिर समिति के बटुक रामघाट पर आरती करने पहुंचे तो पंडा समिति के पुरोहितों ने उन्हें रोका। विवाद को देखते हुए एसडीएम एलएन गर्ग, पवन बारिया और महाकाल थाना पुलिस का बल पहले से घाट पर मौजूद था। एसडीएम ने पुरोहितों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे आरती नहीं करने देने की बात पर अड़े रहे। करीब आधे घंटे तक विवाद की स्थिति बनी रही। इसके बाद पुलिस ने पुरोहितों को घाट से हटाया और महाकाल मंदिर समिति के बटुकों से आरती कराई।

21 विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती की
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने गुरुवार शाम रामघाट के समीप शिप्रा आरती की शुरुआत कर दी है। मंदिर समिति द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान के 21 विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती की। प्रशासन के इस निर्णय को तीर्थ परंपरा के परिष्कार तथा वैदिक शिक्षा को सम्मान दिलाने का माध्यम माना जा रहा है।

इस नवाचार ने देश की गुरुकुल पाठशालाओं में वेदाध्ययन करने वाले वेदपाठी बटुकों के लिए स्वर्णिम भविष्य के द्वार खोल दिए हैं। गुरु शिष्य परंपरा की संवाह रही भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली साढ़े पांच हजार सालों से वेद, व्याकरण, संस्कृति साहित्य के अध्ययन, अध्यापन का केंद्र रही है। वर्तमान में भी उज्जयिनी की धर्मधरा से श्री महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान तथा श्री महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्व विद्यालय के माध्यम से देशभर में बटुक वेदाध्ययन कर रहे हैं।

वेद, ज्योतिष,कर्ककांड, मंदिर प्रबंधन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा की डिग्री प्राप्त करने के बाद इन विद्यार्थियों के भविष्य की राह तीर्थ व मंदिरों तक जाती है। यहां पहले से ही वंश परंपरा के अनुसार व्यवस्था संचालित होती है, ऐसे में इन विद्यार्थियों को सहायक के रूप में काम करना पड़ता है। लेकिन मंदिर समिति ने शिप्रा के तट पर शिप्रा आरती की शुरुआत कर परंपरा में परिष्कार व बटुकों के लिए स्वर्णिम भविष्य की संभावना के नए द्वार खोल दिए हैं।

उक्त संस्थानों में वेदाध्ययन कर चुके डिग्रीधारी बटुक तीर्थ तथा मंदिरों की धार्मिक व्यवस्था को और भी अधिक शास्त्रसम्मत व सशक्त बना सकते हैं। देश में रोल माडल बनेगी यह व्यवस्था देश के प्रमुख तीर्थ व मंदिरों में पूजा,अर्चना की परंपरागत व्यवस्था चली आ रही है। मंदिर समिति ने इसमें कहीं भी हस्तक्षेप नहीं किया है। शिप्रा के सभी प्रमुख घाटों पर सालों से चली आ रही शिप्रा आरती यथावत चल रही है। मंदिर समिति ने केवल एक घाट पर नई आरती शुरू की है। इससे शिप्रा का वैभव बढ़ेगा यह व्यवस्था देश के धर्म स्थलों पर रोल माडल बनेगी। इससे वेद अध्ययन कर रहे बटुकों को मंदिर तथा तीर्थों में सेवा,पूजा, अनुष्ठान के नए अवसर मिलेंगे।

प्राचीन परंपरा में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष तीर्थपुरोहित पं.राजेश त्रिवेदी आमवाला पंडा ने कहा कि महाकाल मंदिर समिति ने शिप्रा के घाट पर आरती की शुरुआत कर सनातन हिन्दू धर्म की प्राचीन परंपरा का तोड़ने का प्रयास किया है। अनादिकाल से तीर्थ व मंदिरों की अपनी एक परंपरा व मर्यादा रही है। जहां की पूजा अर्चना का अधिकार वंश परंपरा से तीर्थपुरोहित व पुजारियों को है। इसमें हस्तक्षेप करने से यह पुरातन व्यवस्था भंग हो जाएगी और एक धार्मिक व्यवस्था का सारा तानाबाना टूट जाएगा। पुराने अधिकारी इस बात को समझते थे, वर्ष 2015 में महाकाल मंदिर समिति ने शिप्रा आरती की शुरुआत की थी और श्री क्षेत्र पंडा समिति के माध्यम से राणौजी की छत्री घाट पर तीर्थपुरोहित के माध्यम से इसकी शुरुआत हुई थी। अपने पंडितों को लाकर नई व्यवस्था शुरू करना प्राचीन परंपरा में हस्तक्षेप है, इसका हम समस्त तीर्थपुरोहित विरोध करते हैं। फिर भी अगर मंदिर समिति तीर्थ और उसके पुरोहितों की परंपरा को खंडित करती है, तो हमारी मांग है कि हम पुरोहितों को महाकाल मंदिर में पूजन का अधिकार दिया जाए।

बटुकों को आरती करने से रोका
बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित रामघाट पर एकत्र हुए थे। प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से पुरोहितों की जगह आरती कराने का प्रयास किए जाने पर विरोध शुरू हो गया। पुरोहितों का कहना था कि महाकाल मंदिर समिति को आरती की जिम्मेदारी देकर उन्हें परंपरा से अलग किया जा रहा है।

प्रशासन ने कहा- आरती का स्वरूप बदला जा रहा है
एसडीएम पवन बारिया ने कहा कि महाकाल प्रबंध समिति की ओर से नई शुरुआत की जा रही है। हरिद्वार में गंगा आरती की तरह उज्जैन में भी शिप्रा नदी के किनारे भव्य आरती शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी को हटाने या रोकने की बात नहीं है। मंदिर समिति की ओर से आरती के स्वरूप में नवाचार किया जा रहा है।

दोनों को साथ आरती कराने का प्रस्ताव भी दिया गया था
एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि प्रशासन ने पंडा समिति के पुरोहितों को महाकाल मंदिर समिति के बटुकों के साथ आरती में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था, ताकि दोनों मिलकर आरती कर सकें। हालांकि, पुरोहित इसके लिए तैयार नहीं हुए। प्रशासन के अनुसार, अब रोजाना शिप्रा आरती महाकाल मंदिर समिति की ओर से कराई जाएगी।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button