राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

बिहार बनेगा देश का तीसरा R&D बजट वाला राज्य, ज्ञान-तकनीक आधारित विकास पर जोर

 पटना
बिहार सरकार के वित्त विभाग एवं बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (बीआइपीएफपी) की ओर से गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में बिहार में अनुसंधान एवं विकास बजट विषय पर चर्चा हुई।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य को पारंपरिक व्यय-प्रेरित विकास मॉडल से आगे ले जाकर ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित मॉडल पर स्थापित करना था। बताया गया कि केरल ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और पंजाब ने 2025-26 से अपने अनुसंधान और विकास बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।

बिहार के परिप्रेक्ष्य में इन राज्यों की पद्धतियों को अपनाते हुए एक स्पष्ट वर्गीकरण ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत मौजूदा विभागीय योजनाओं के भीतर छिपे हुए अनुसंधान और विकास घटकों की पहचान की जाएगी और प्रो-राटा आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाएगा।

बिहार देश का तीसरा ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जो अनुसंधान एवं विकास के लिए अलग से बजट तैयार करेगा। कार्यशाला में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि अनुसंधान और विकास केवल विज्ञान, प्रौद्योगिकी या आईटी विभागों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, उद्योग और सामाजिक कल्याण जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में विस्तृत है।

सार्वजनिक वित्त का एक अनिवार्य हिस्सा
वित्त विभाग की सचिव (व्यय) सह निदेशक बीआइपीएफपी रचना पाटिल ने राज्य के वित्तीय ढांचे में शोध और नवाचार को संस्थागत रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य के विकसित बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनुसंधान और विकास को जन-नीति और सार्वजनिक वित्त का एक अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा।

पारंपरिक रूप से जहां बजट खर्च को केवल लागत माना जाता है, वहीं अनुसंधान और विकास बजट को भविष्य की उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। सत्र में अपर सचिव संजीव मित्तल, बीआइपीएफपी के फैकल्टी मेंबर्स डॉ. बरना गांगुली, डॉ. बख्शी अमित कुमार सिन्हा आदि उपस्थित रहे।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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