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केदारनाथ से मसूरी तक 8 रोपवे प्रोजेक्ट, उत्तराखंड में सफर होगा आसान; जानें कहां-कहां बनेंगे

देहरादून

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में रोपवे कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को राहत मिलेगी, बल्कि सड़क मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम होगा। केदारनाथ से मसूरी तक कुल 8 रोपवे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। सोमवार को सीएम धामी ने अधिकारियों को कार्य पूरा करने की डेडलाइन दे दी।

मुख्यमंत्री ने अपने कैंप कार्यालय में राज्य के प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट की समीक्षा की। रोपवे निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के लिए लक्ष्य तय कर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोपवे प्रोजेक्ट वाले जिलों के डीएम प्रस्तावित और निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाओं की नियमित निगरानी करें। इनके निर्माण में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का हल निकालने के लिए समन्वय से काम करें।

रोपवे के साथ पार्किंग सुविधा पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक रोपवे परियोजना के साथ पर्याप्त पार्किंग सुविधा को समेकित योजना का हिस्सा बनाएं। साथ ही निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लाइसेंसिंग एवं अनुमोदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी बनाया जाए।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रोपवे प्रोजेक्ट राज्य में कनेक्टिविटी के लिए बेहतर विकल्प हैं। इनकी मदद से पर्यटक और श्रद्धालुओं के लिए काफी सुविधा मिलेगी। जल्द से जल्द सभी प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा।

9 नवंबर वाली डेडलाइन और 15 दिन के भीतर काम दिखे
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि नौ नवंबर तक सभी रोपवे के कार्य धरातल पर प्रमुखता से होते दिखाई देने चाहिए। इसके साथ ही सभी निर्माण एजेंसियां पंद्रह दिन के भीतर अब तक की प्रगति की रिपोर्ट को मुख्य सचिव को सौंपेंगी। मुख्यमंत्री इन प्रोजेक्ट की नियमित रूप से समीक्षा करेंगे।

सुरक्षा-पर्यावरण का रहे विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बनने वाले पर्यटन और कनेक्टिविटी से जुड़े हर प्रोजेक्ट में यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। रोपवे परियोजनाओं से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। निर्माण कार्य में पर्यावरण संरक्षण के मानकों को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ा जाए। उत्तराखंड इकोनामी के साथ साथ इकोलॉजी को भी बराबर महत्व देते हुए आगे बढ़ रहा है। इसका संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

राज्य के प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट

● सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ-12.90 किमी

● गोविंद घाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब 12.40 किमी

● काठगोदाम बस स्टैंड-हनुमान गढ़ी मंदिर-14.90 किलोमीटर

● जोशीमठ-औली-गौरसौं -6.92 किलोमीटर

● गौंडार-श्रीमदमहेश्वर-6.5 किलोमीटर

● देहरादून-पुरकुल-मसूरी 5.5 किलोमीटर

● यमुनोत्री प्रोजेक्ट-जानकीचट्टी- यमुनोत्री मंदिर-3.39 किमी

● तपोवन-कुंजापुरी रेापवे प्रोजेक्ट-4.84 किलोमीटर

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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