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‘हनुमान अंश’ में दिखी नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा, सीएम धामी ने देखी फिल्म

‘हनुमान अंश’ में दिखी नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा, सीएम धामी ने देखी फिल्म

देहरादून
 उत्तराखंड की देवभूमि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ संतों और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए भी विशेष पहचान रखती है। इसी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी प्रसिद्ध संत एवं आध्यात्मिक विभूति नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी भक्ति, सेवा और मानव कल्याण के संदेश पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाथीबड़कला स्थित सेंट्रियो मॉल के सिनेमा हॉल में देखा।

फिल्म देखने के लिए मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा सहित विभिन्न दायित्वधारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की संत परंपरा ने सदियों से समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है। नीम करौली बाबा का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा की भक्ति, मानव सेवा और सभी के प्रति प्रेम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनका जीवन समाज को सेवा, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कैंची धाम बना आस्था का प्रमुख केंद्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि महान संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भी है। नीम करौली बाबा से जुड़ा कैंची धाम आज देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में श्रद्धा और आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

उन्होंने कहा कि संतों के जीवन और उनके विचारों को रचनात्मक माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाना भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से युवाओं को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

भक्ति, सेवा और मानव कल्याण पर केंद्रित फिल्म

‘हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़े उन मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिनमें ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, मानव सेवा, करुणा, प्रेम, विनम्रता और लोककल्याण प्रमुख हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने फिल्म को भारतीय संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने वाला सकारात्मक प्रयास बताते हुए इसके निर्माताओं और पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और संत परंपरा पर आधारित प्रेरणादायी फिल्में समाज में सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

नीम करौली बाबा का जीवन और उनका सेवा-संदेश आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है। ऐसे में उनकी आध्यात्मिक यात्रा को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास उत्तराखंड की समृद्ध संत परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत को व्यापक मंच देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है।अगर आप चाहें तो इसे और ज्यादा मैगज़ीन फीचर जैसा बनाकर 600–700 शब्दों में, शुरुआत में एक प्रभावी आध्यात्मिक उद्धरण/ओपनिंग के साथ भी तैयार किया जा सकता है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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