उच्च शिक्षा में नवाचार और शोध उत्कृष्टता समय की आवश्यकता: डॉ. स्मिता सेलट
श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ

भिलाई- श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षण में नवाचार, शोध की उत्कृष्टता तथा बदलते शैक्षणिक परिदृश्य के अनुरूप फैकल्टी को सक्षम बनाने के उद्देश्य से पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम ‘उच्च शिक्षा में नवाचारी शिक्षण, शोध उत्कृष्टता और नए परिवर्तन का शुभारंभहुआ।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. स्मिता सेलट ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी संसाधनों, शोध के नए आयामों तथा वैश्विक शैक्षणिक परिवर्तनों से निरंतर अवगत रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, अनुसंधान दृष्टि, नैतिक मूल्यों और नवाचार की भावना विकसित करने वाला मार्गदर्शक भी है।
डॉ. सेलट ने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ शोध संस्कृति को मजबूत करना और नवाचार को प्रोत्साहित करना प्राथमिकता है। फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों को अपने ज्ञान एवं कौशल को अद्यतन करने तथा अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. सोनू अग्रवाल ने बताया कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को नवीन शिक्षण तकनीकों, शोध पद्धतियों, अकादमिक नैतिकता, बौद्धिक संपदा तथा उच्च शिक्षा में हो रहे नए परिवर्तनों से परिचित कराना है।
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के प्रथम दिवस” बौद्धिक संपदा अधिकार एवं शोध नैतिकता’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ अमरीश चंद्रा एवं हिदायतुल्लाह लॉ यूनिवर्सिटी की प्राध्यापक डॉ अपूर्वा शर्मा नेबौद्धिक संपदा अधिकारों की अवधारणा, शोध कार्य में मौलिकता, कॉपीराइट, पेटेंट, शोध में नैतिक मूल्यों तथा अकादमिक ईमानदारी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागी शिक्षकों ने विषय से संबंधित प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों के साथ सार्थक संवाद भी किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। पांच दिवसीय यह कार्यक्रम शिक्षकों के अकादमिक एवं शोध कौशल को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ विश्वविद्यालय में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और उत्कृष्ट शोध की संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।कार्यक्रम का समन्वय पूजा ठाकुर रिंकू मिश्रा, आदर्श मिश्रा, धीरेंद्र पराते ने किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ आकांक्षा शर्मा ने किया।




