Bastar में अनोखी पहल, ‘हेलमेट बैंक’ से सिर्फ 10 रुपये में होगी सिर की सुरक्षा

बस्तर.
लोहंडीगुड़ा में सड़क सुरक्षा को लेकर जनपद पंचायत ने एक नई पहल शुरू की है। अब हेलमेट नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को बिना सुरक्षा दोपहिया चलाने की मजबूरी नहीं होगी। जनपद पंचायत ने हेलमेट बैंक की शुरुआत कर जरूरतमंदों को कम शुल्क में हेलमेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
अस्पताल चौक स्थित सुरेंद्र पान भंडार को हेलमेट बैंक का पहला केंद्र बनाया गया है। दोपहिया चालक महज 10 रुपये प्रतिदिन के टोकन शुल्क या वैध पहचान पत्र के आधार पर हेलमेट ले सकेंगे। यात्रा पूरी होने के बाद हेलमेट वापस जमा करना होगा, जिसे सैनिटाइज कर दोबारा उपयोग में लाया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में हेलमेट की अनुपलब्धता और आर्थिक परेशानी को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की गई है। जनपद पंचायत का कहना है कि इसका उद्देश्य चालान का डर पैदा करना नहीं, बल्कि स्वेच्छा से हेलमेट पहनने की आदत विकसित करना है। हेलमेट बैंक की शुरुआत के दौरान जनपद पंचायत उपाध्यक्ष डॉ. बसंत कश्यप और सरपंच भरत कश्यप मौजूद रहे। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने ग्रामीण इसे अपनाकर सड़क सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी बनाते हैं।
ग्रामीणों ने खुद उठाया सड़क बहाली का बीड़ा
नारायणपुर। बारिश ने झारावाही, हतलानार और दुम्मा इलाके के ग्रामीणों के सामने सड़क संपर्क का संकट खड़ा कर दिया। मुख्य मार्ग की पुलिया बहने के बाद कई गांवों की आवाजाही प्रभावित हो गई। हालात बिगड़े तो ग्रामीण प्रशासन का इंतजार करने के बजाय खुद ही रास्ता बहाल करने मैदान में उतर गए। ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान कर क्षतिग्रस्त हिस्से में ह्यूम पाइप लगाने की कोशिश शुरू की। पानी और कीचड़ के बीच ग्रामीण भारी पाइप को कंधों पर उठाकर मौके तक ले जाते दिखाई दिए। यह तस्वीर ग्रामीणों की एकजुटता के साथ सरकारी व्यवस्था की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग की खराब स्थिति की जानकारी पहले भी संबंधित स्तर पर दी गई थी। इसके बावजूद समय रहते स्थायी व्यवस्था नहीं होने से उन्हें खुद समस्या से निपटना पड़ा। सड़क संपर्क टूटने का असर स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है। ग्रामीणों ने तत्काल रास्ता बनाने की पहल कर दी है, अब प्रशासन के सामने सुरक्षित और स्थायी बनाने की चुनौती है।




