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सिंगरौली बनेगा मॉडल जिला, कृषि-वन से लेकर सड़क और जल प्रबंधन तक होंगे खास इंतजाम

सिंगरौली 

 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य की खनिज संपदा विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इसका इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए।'राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026' की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज नीतियों का मकसद राजस्व बढ़ाना और साथ ही रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के मौकों का विस्तार करना होना चाहिए। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है।बैठक में मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और खनिज संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी
मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी और अधिकारियों को जनहित में इसे प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिला खनिज कोष (DMF) का सही इस्तेमाल करके खनिज-समृद्ध सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन, पर्यावरण, सड़क सुविधाओं और जल-संसाधन प्रबंधन के क्षेत्रों में एक मॉडल जिले के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की खनिज संपदा राज्य के विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इन प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए, जिससे राजस्व की प्राप्ति हो, निवेश को बढ़ावा मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके पैदा हों।
प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का काम होना चाहिए

उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से होने वाले ज्यादातर फायदे को जन-कल्याणकारी योजनाओं में लगाया जाना चाहिए। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए मध्य प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

बैठक में खनिज संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने बताया कि कई पहलों के जरिए खनिज से होने वाले राजस्व को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मकसद 2026-27 के आखिर तक खनिज संसाधनों से होने वाली आय को 13,720 करोड़ रुपये और 2030-31 तक 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।

सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है
मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में,अगस्त 2026 के आखिर तक मिनरल से होने वाली कमाई सालाना लक्ष्य (106 प्रतिशत) से ज्यादा रही। जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है। इनमें सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, बालाघाट, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल शामिल हैं।

मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में जुलाई 2026 के आखिर तक इन दस जिलों के पास कुल 3,147.10 करोड़ रुपये का डीएमएफ फंड मौजूद है, जिसमें सिंगरौली जिले का योगदान सबसे अधिक है। बताया गया कि सभी 55 जिलों का कुल डीएमएफ फंड 3,574.53 करोड़ रुपये है।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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