राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र पर राहत, दो साल बाद पंजीयन के लिए नई व्यवस्था लागू होने तक पुराने नियम जारी

भोपाल

मध्य प्रदेश में दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों के विलंबित पंजीयन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति साफ हो गई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि आगामी आदेश तक ऐसे मामलों में पूर्ववत प्रक्रिया के तहत ही पंजीयन किया जाएगा। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी ने सभी कलेक्टरों और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं।

दरअसल, जिलों से शिकायतें मिल रही थीं कि प्रशासनिक मजिस्ट्रेट यानी तहसीलदार 6 अगस्त 2026 के जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक के राजपत्र नोटिफिकेशन का हवाला देकर दो साल से अधिक पुराने मामलों के पंजीयन की अनुमति संबंधी आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कई लोक सेवा केंद्रों पर भी आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे लोगों को जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने में परेशानी हो रही थी और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें बढ़ रही थीं।

रजिस्ट्रार जनरल ने अभी कोई नया आदेश नहीं दिया
मुख्य रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, नई दिल्ली की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई नया आदेश या निर्देश जारी नहीं हुआ है। इसलिए 6 अगस्त के राजपत्र नोटिफिकेशन के आधार पर दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों का पंजीयन रोकने का कोई आधार नहीं है।

धारा 13(3) के तहत पुरानी प्रक्रिया जारी
पत्र में कहा गया है कि जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया फिलहाल पहले की तरह लागू रहेगी। यानी दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीयन कराने के लिए मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार ही आवेदन और कार्रवाई की जाएगी।

सभी कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधीनस्थ अधिकारियों को इसकी जानकारी दें, ताकि लोगों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

संशोधन लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
2026 के संशोधन में विलंबित पंजीयन की व्यवस्था को और सख्त किया गया है। एक साल से अधिक और दो साल के भीतर सूचना देने पर पंजीयन जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से होगा। अधिकारी को घटना की सत्यता का सत्यापन भी करना होगा और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

वहीं दो साल से अधिक पुराने मामले में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश जरूरी होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट भी पंजीयन का आदेश देने से पहले घटना की सत्यता का सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

पहले और अब में अंतर
पहले एक साल से अधिक देरी वाले जन्म-मृत्यु पंजीयन में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। 2026 के संशोधन में दो साल से अधिक पुराने मामलों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से हटाकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के स्तर पर कर दिया गया है। इससे दो साल बाद होने वाला पंजीयन अधिक सत्यापन आधारित और सख्त होगा।

MP में अभी पुरानी व्यवस्था क्यों?
नए प्रावधान के अनुसार संशोधन केंद्र सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की तारीख से लागू होगा। मध्यप्रदेश के मुख्य रजिस्ट्रार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई नया आदेश नहीं मिलने के कारण राज्य में दो साल से अधिक पुराने मामलों के लिए पुरानी प्रक्रिया ही जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

2023 के संशोधन में क्या बदला था?
2023 के संशोधन में जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर जन्म-मृत्यु का डेटाबेस तैयार करना, राज्यों का एकीकृत डेटाबेस बनाना, उपलब्ध होने पर माता-पिता और सूचनादाता का आधार नंबर दर्ज करना तथा गोद लिए, सरोगेसी से जन्मे और एकल/अविवाहित मां से जन्मे बच्चों के मामलों में सूचना की व्यवस्था शामिल है।

इसके अलावा जन्म प्रमाण-पत्र को जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में महत्वपूर्ण बनाया गया। शैक्षणिक प्रवेश, मतदाता सूची और सरकारी नौकरी सहित विभिन्न कामों में जन्म प्रमाण-पत्र के उपयोग का प्रावधान किया गया। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जोड़ी गई।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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