राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

H-1B Visa पर ट्रंप का बड़ा फैसला, 1 लाख डॉलर फीस की मियाद एक साल और बढ़ाई

वॉशिंगटन
 अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B गैर-अप्रवासी वीजा के लिए 100,000 डॉलर का शुल्क लगाने वाले कार्यकारी आदेश को एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। यह जानकारी व्हाइट हाउस ने दी है। H-1B वीजा अमेरिका का एक अस्थायी गैर अप्रवासी वीजा है। इस वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां आईटी, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करती हैं। हर साल लॉटरी के जरिए 85,000 H-1B वीजा जारी किए जाते हैं।

ट्रंप ने H-1B वीजा के शुल्क की अवधि बढ़ाई
ट्रंप H-1B वीजा के कड़े आलोचकों में गिने जाते हैं। उन्होंने शुरू से ही इस वीजा प्रोग्राम की आलोचना की है। पहले H-1B वीजा पर फीस को 100000 डॉलर तक बढ़ा दिया था। शुरुआत में यह आदेश सिर्फ एक साल के लिए था, जिसे अब एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया है। अब 21 सितंबर 2027 तक H-1B वीजा के लिए 100000 डॉलर की फीस भरनी होगी।

H-1B वीजा पर अमेरिकी अदालतों में सुनवाई
हालांकि, ट्रंप के H-1B वीजा शुल्क को अदालतों में कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। बोस्टन स्थित एक अपीलीय अदालत जून में एक संघीय न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा कर रही है , जिसमें ट्रंप प्रशासन के लगाए गए उच्च शुल्क को अवैध करार दिया गया था और सरकार को इसे वसूलने से रोक दिया गया था। एक अन्य अदालत इस बात पर विचार कर रही है कि क्या न्यायाधीश ने अमेरिकी व्यापार संघ के सबसे बड़े लॉबिंग समूह, यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका को उचित रूप से खारिज कर दिया था।

ट्रंप ने H-1B वीजा का शुल्क कब बढ़ाया था?
H-1B वीजा शुल्क वृद्धि के लिए ट्रंप का प्रारंभिक आदेश पहली बार सितंबर 2025 में जारी किया गया था। वह आदेश इस महीने समाप्त होने वाला था। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं होता था जो पहले से ही छात्र वीजा पर संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं, जो नए एच-1बी प्राप्तकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा हैं, या मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी लागू नहीं होता था।

H-1B वीजा का इस्तेमाल किस लिए होता है?
ट्रंप की आलोचना के बावजूद कि कुछ कंपनियां अमेरिकियों के बजाय कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों को काम पर रखने के लिए H-1B वीजा का उपयोग करती हैं। व्यापार समूह और कंपनियों का कहना है कि वे H-1B वीजा के जरिए उच्च कुशल पेशेवरों की भर्ती इसलिए करती हैं, ताकि कुछ उद्योगों में योग्य अमेरिकी श्रमिकों की कमी को दूर किया जा सके। कांग्रेस द्वारा 1990 में स्थापित किया गया H-1B वीजा, भारत और चीन से भर्ती करने की इच्छुक प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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