राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

क्षमावाणी आत्मचिंतन, संवाद और अहंकार पर विजय प्राप्त करने का अनुपम पर्व : राज्यमंत्री गौर

भोपाल

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा है कि क्षमावाणी केवल क्षमा याचना और क्षमा दान तक सीमित नहीं, बल्कि यह आत्मचिंतन, जीवन में जीवंत संवाद को अंगीकार करने, अहंकार पर विजय प्राप्त करने का अनुपम पर्व है। क्षमा का आचरण, संवाद की निरंतरता और अहंकार का विसर्जन ही वास्तव में मनुष्यता की सच्ची वीरता है। ऐसे सात्विक कार्य मनुष्य को आत्मसंतुष्टि प्रदान करने के साथ समाज में सकारात्मकता का संचार करते हैं। राज्यमंत्री  गौर रविवार को भोपाल के साकेत नगर स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित क्षमावाणी महोत्सव को संबोधित कर रही थीं।

 गौर ने भारतीय संस्कृति की समावेशी चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति मूलतः जोड़ने की संस्कृति है। हमारी युगों पुरानी परंपराएं एवं धार्मिक पर्व समाज में परस्पर प्रेम, सौहार्द और भ्रातृभाव की जड़ों को सींचकर मजबूत करते हैं। जैन दर्शन के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जैन चिंतन ने सदैव जनमानस को अनुप्राणित किया है। यह दर्शन आत्मा की असीम विशालता तथा मानव जीवन में संयम, करुणा एवं सद्भाव के अपरिहार्य महत्व का प्रत्यक्ष बोध कराता है।

राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि क्षमावाणी के इस पावन संदेश को केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित न रखकर सामाजिक जीवन के प्रत्येक आयाम में आत्मसात करने की महती आवश्यकता है। अंतःकरण में निहित प्रेम, करुणा और क्षमा के संवर्धन से ही समाज में पारस्परिक विश्वास, बंधुत्व और सामाजिक समरसता को और अधिक सुदृढ़ एवं अटूट बनाया जा सकता है।

महोत्सव के अवसर पर राज्यमंत्री  गौर ने जैन समाज के प्रबुद्धजनों एवं श्रद्धालुओं को क्षमावाणी पर्व की बधाई व शुभकामनाएं भी दीं।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button