UPSC के पेपरवार नंबर होंगे सार्वजनिक, CIC ने DoPT को 3 हफ्ते में जानकारी देने का निर्देश

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पेपरवार अंकों के प्रकाशन को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक अहम् आदेश दिया है. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को एक बड़ा निर्देश दिया है. उन्हें 2018 से 2023 तक सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए उम्मीदवारों के हर सामान्य अध्ययन (जीएस) पेपर, वैकल्पिक विषय के दोनों पेपर और पर्सनैलिटी टेस्ट के नंबर देने होंगे. यह जानकारी अपील करने वाले को आदेश मिलने के तीन हफ्ते के अंदर देनी होगी.
नंबर पब्लिक करना चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए ज़रूरी
सीआइसी ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा की मेरिट लिस्ट मुख्य परीक्षा और पर्सनैलिटी टेस्ट में मिले नंबरों के आधार पर बनती है. चुने गए कैंडिडेट्स के लिए सात जरूरी लिखित पेपर्स में कम से कम 10 फीसदी नंबर लाना जरूरी है. इनमें ऐसे, जीएस-1, जीएस-2, जीएस-3, जीएस-4 और ऑप्शनल सब्जेक्ट के दो पेपर शामिल हैं. ऐसे में पेपर के हिसाब से नंबर पब्लिक करना चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए ज़रूरी है.
2018 से बंद था पेपरवार अंकों का प्रकाशन
सीआइसी के ऑर्डर के मुताबिक, 2017 तक चुने गए कैंडिडेट्स के मेन एग्ज़ाम के पेपरवाइज़ नंबर पब्लिक किए जाते थे. इनमें ऐसे, जनरल स्टडीज़ और ऑप्शनल सब्जेक्ट के दोनों पेपर के नंबर शामिल थे. 2018 से यह सिस्टम बंद कर दिया गया और पब्लिकली मेन एग्ज़ाम के टोटल नंबर और पर्सनैलिटी टेस्ट वगैरह की जानकारी दी जाने लगी.
RTI के ज़रिए मांगी पिछले 10 सालों के नंबर की जानकारी
इस मामले में कैंडिडेट अनिकेत कुमार गुप्ता ने नवंबर 2024 में आरटीआइ के ज़रिए पिछले 10 सालों के चुने गए कैंडिडेट्स के पेपरवाइज़ नंबर की जानकारी मांगी थी. उन्होंने हर जीएस पेपर, ऑप्शनल सब्जेक्ट और पर्सनैलिटी टेस्ट में मिले नंबरों का सालवार ब्योरा मांगा था.
पेपरवार अंक बंद करने का रिकॉर्ड नहीं मिला
मामले की सुनवाई के दौरान सीआइसी ने डीओपीटी से पेपरवाइज़ नंबरों का पब्लिकेशन बंद करने के फ़ैसले से जुड़ी कोई भी सरकारी फ़ाइल, आदेश या नियम-कानून दिखाने को कहा. डीओपीटी ने बताया कि रिकॉर्ड चेक करने के बाद भी ऐसा कोई डॉक्यूमेंट नहीं मिला, जिसमें 2017 के बाद पेपरवाइज़ नंबर पब्लिश करने का सिस्टम बंद करने का एडमिनिस्ट्रेटिव फ़ैसला या उसके रीज़न दर्ज हों.
दिए जाते है DoPT और LBSNAA को नंबर
डीओपीटी ने यह भी कहा कि डिटेल्ड नंबरों का रिकॉर्ड तैयार करने, सर्टिफाई करने और सेफ रखने का काम यूपीएससी करता है. वहीं, यूपीएससी ने सुनवाई में बताया कि फ़ाइनल रिज़ल्ट आने के बाद चुने गए कैंडिडेट्स के डिटेल्ड नंबर डीओपीटी और लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी (एलबीएसएनएए) को दिए जाते हैं.
कोचिंग संस्थानों के दुरुपयोग की आशंका का दिया गया तर्क
डीओपीटी ने पेपरवाइज़ नंबर पब्लिक न करने के पीछे यह डर जताया कि कोचिंग इंस्टिट्यूट्स ऑप्शनल सब्जेक्ट के नंबरों का कमर्शिअल इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ सब्जेक्ट्स को ज्यादा नंबर दिलाने वाले सब्जेक्ट के तौर पर प्रमोट करके कैंडिडेट्स को इन्फ़्लुएंस करने का ख़तरा भी जताया गया. हालांकि, सीआइसी के सामने इस फैसले के सपोर्ट में कोई लिखित रिकॉर्ड या पॉलिसी डॉक्यूमेंट पेश नहीं किया गया. आयोग ने कहा कि चुने गए कैंडिडेट्स के नाम, कैटेगरी और टोटल नंबर पहले से पब्लिक हैं. ऐसे में डिटेल्ड पेपरवाइज़ नंबर देने से टोटल नंबरों की स्ट्रक्चर ज़्यादा क्लियर होगी.
भविष्य में भी पेपरवार अंक प्रकाशित करने की सलाह
सीआइसी ने आरटीआइ ऐक्ट की धारा 25(5) के तहत डीओपीटी को सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के चुने गए कैंडिडेट्स के डिटेल्ड पेपरवाइज़ नंबर पब्लिश करने की पुरानी व्यवस्था फिर से शुरू करने की सलाह दी है.
बंद करने के बारे में कोई पॉलिसी डिसीज़न रिकॉर्ड में नहीं
आयोग के मुताबिक, 2018 से पहले यह जानकारी पब्लिक की जाती थी और इसे बंद करने के बारे में कोई पॉलिसी डिसीजन रिकॉर्ड में नहीं है. सीआइसी के निर्देश के बाद 2018 से 2023 तक के चुने गए कैंडिडेट्स के जीएस, ऑप्शनल सब्जेक्ट और पर्सनैलिटी टेस्ट के नंबरों की जानकारी देने की प्रोसेस आगे बढ़ेगी.




