राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

MP में नकल रोकने के लिए बड़ा फैसला, भोपाल-इंदौर समेत 4 शहरों में बनेंगी फास्ट ट्रैक कोर्ट

भोपाल
 प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए एमपी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद सीएम मोहन यादव ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन करने का फैसला लिया है। मध्य प्रदेश में चार स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य बन गया है।

तीन महीने के भीतर मामले का होगा निपटारा
विशेष फास्‍ट ट्रैक कोर्ट परीक्षाओं मे नकल रोकने के लिए बनाई गई त्‍वरित जांच/कानूनी प्रणाली या उडनदस्‍तों से संबंधित है। इन फास्‍ट-ट्रैक अदालतों को चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मामले का निपटारा (ट्रायल पूरा) करने का लक्ष्‍य दिया गया है। फास्‍ट-ट्रैक कोर्ट मे पैरवी विशेष अभियोजक करेंगें। संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्‍व मे एसआईटी का गठन किया गया है। फास्‍ट-ट्रैक कोर्ट भोपाल, इंदौर, ग्‍वालियर, और जबलपुर महानगरों में बनाई जायेगी, जिनका कार्यक्षेत्र निर्धारित किया गया है।

किस कोर्ट में किन जिलों की होगी सुनवाई
    भोपाल : भोपाल में फास्‍ट-ट्रैक विशेष न्‍यायालय के अंर्तगत भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिलों के मामलों की सुनवाई करेगी।

    इंदौर : इंदौर में फास्‍ट-ट्रैक विशेष न्‍यायालय के अंर्तगत इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन, देवास और आसपास के मालवा-निमाड़ क्षेत्र के मामलों को देखेगी।

    ग्वालियर : ग्‍वालियर में फास्‍ट-ट्रैक विशेष न्‍यायालय के अंर्तगत ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ जिलों का अधिकार क्षेत्र इसके पास है।

    जबलपुर : जबलपुर में फास्‍ट-ट्रैक विशेष न्‍यायालय के अंर्तगत जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल और महाकौशल/बुंदेलखंड के अन्य जिलों के मामले यहां सुने जाएंगे।

 

विशेष अभियोजकों की भी नियुक्ति
राज्‍य शासन ने फास्‍ट-ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की है। विशेष अभियोजक इन प्रकरणों में साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतिकरण, गवाहों के समुचित प्रबंधन और न्यायालयीन पैरवी पर विशेष ध्यान देंगे। इससे मामलों की सुनवाई अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने में सहायता मिलेगी।

परीक्षा प्रणाली पर बना रहा विश्वास
राज्य शासन का यह प्रयास मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा देने वाले युवाओं के हितों की रक्षा तथा परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़े अन्य अपराधों के मामलों में प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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