राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

हार्वर्ड-MIT के 400 भारतवंशी चुनाव आयोग के समर्थन में आए, अभिजीत दीपके को जवाब

नई दिल्ली
दुनिया के 27 देशों में रहने वाले भारतीय मूल के 400 से अधिक छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व विद्यार्थियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शनों की आलोचना की है। ‘भारत को अराजकता से बचाएं’ शीर्षक वाले संयुक्त बयान में कहा गया कि ऐसे प्रदर्शन संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर कर सकते हैं।

इस बयान में दस्तखत करने वालों ने अभिजीत दीपके की भाषा में ही चेतावनी भी दी है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने बाबासाहब आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवैधानिक तरीकों से हो। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को चुनौती देने के लिए 'सड़कों पर अराजक प्रदर्शनों' की आलोचना की और चेतावनी दी कि संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर उसे ही कमजोर न किया जाए।

चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोल
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वि
पक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। वहीं कॉकरोच जनता पार्टी ने भी आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बीते कुछ दिनों में कई प्रदर्शन किए हैं। अभिजीत दीपके इन आंदोलनों की अगुवाई कर रहे हैं। इस क्रम में वे दो बार डिटेन भी हुए हैं।

बयान में और क्या?
बयान में आगे कहा गया है, ''भारतीय लोकतंत्र में संदेह के बीज बोने की एक बेहद अनुचित और कुटिल साजिश रची गई है। इसके लिए अदालत में विचाराधीन मामलों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, और फिर अराजकतावादी ताकतों का सहारा लेकर इसे सड़कों पर और हवा दी जा रही है। ये ताकतें ऐतिहासिक और वैचारिक रूप से कभी भी संवैधानिक शासन व्यवस्था में विश्वास नहीं रखतीं। और यह सब लोकतंत्र को बचाने के नाम पर किया जा रहा है।''

माहौल देखकर दुखी
बयान में कहा है कि भारतवंशी इस माहौल को देखकर दुखी और हैरान हैं। इसमें कहा गया, ''हम इस पूरी स्थिति के विरोधाभास को देखकर हैरान हैं। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के भविष्य से सरोकार रखने वाले जागरूक नागरिकों के रूप में और दुनिया भर में 'भारतीय' के रूप में अपनी पहचान रखने वाले लोगों के तौर पर हम मौजूदा हालात से बेहद दुखी हैं।'' छात्रों ने अफसोस जताया कि कुछ हलकों में 'चुनाव नतीजों को न मानने की सनक, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाना, और 'संसद के बजाय सड़क' को तरजीह देने' का चलन हावी हो गया है।

किन संस्थानों के छात्रों का समर्थन?
हस्ताक्षरकर्ता अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, जापान और सिंगापुर सहित 27 देशों में स्थित विश्वविद्यालयों से जुड़े हैं या वहां पढ़ाई कर चुके हैं। इन संस्थानों में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, हार्वर्ड विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स आदि शामिल हैं। बयान में स्पष्ट किया गया कि इन संस्थानों से जुड़ाव का यह मतलब नहीं है कि संबंधित विश्वविद्यालयों ने भी इस बयान का समर्थन किया है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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