स्वास्थ्य

5 मिनट की टैपिंग थेरेपी से कम होगा तनाव? जानें EFT तकनीक कैसे सुधार सकती है मूड और मानसिक शांति

लगातार काम के बढ़ते स्ट्रेस की वजह से लोगों को अक्सर मानसिक थकान का सामना करना पड़ता है। कई बार यह बोझ इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति के तनाव, मूड खराब रहने और व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण महसूस होते हैं। स्ट्रेस और शारीरिक गतिविधि में कमी के चलते तनाव का असर मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। धीरे-धीरे यह लक्षण आपकी वर्क प्रोडक्टिविटी और निजी जिंदगी को भी खराब करने लगता है। ऐसे में एक्सपर्ट्स और साइकोलॉजिस्ट ब्रेन को रेस्ट देने के लिए योग, मेडिटेशन और थेरेपी को अपनाने की सलाह देते हैं। इन थेरेपी में आज के समय में टैपिंग थेरेपी काफी लोकप्रिय है। इसे इमोशनल फ्रीडम टेक्निक के नाम से भी जाना जाता है। इसका नियमित अभ्यास तनावपूर्ण विचारों और भावनाओं को कंट्रोल करने में मदद करता है।

क्या है बॉडी टैपिंग तकनीक यानी EFT?
EFT यानी इमोशनल फ्रीडम टेक्नीक एक कॉम्प्लिमेंट्री माइंड-बॉडी टेक्नीक है। इसमें व्यक्ति किसी परेशान करने वाली भावना, विचार या स्थिति को पहचानता है और उसी पर ध्यान बनाए रखते हुए शरीर के कुछ पॉइंट्स को उंगलियों से हल्के-हल्के टैप करता है।

एनसीबीआई के अनुसार क्लिनिकल ईएफटी में तीन मुख्य घटक बताए जाते हैं—एक्सपोजर, कॉग्निटिव फ्रेमिंग और एक्यूप्रेशर। यानी व्यक्ति पहले अपने परेशान करने वाले विचार को पहचानता है, फिर उसे शब्दों में स्वीकार करता है और इसके साथ टैपिंग की जाती है।

क्या पांच मिनट में टैपिंग से तनाव में आराम मिलता है?
तनाव और मूड के लिए टैपिंग तकनीक के फायदे
सोशल मीडिया पर टैपिंग को अक्सर “5-मिनट स्ट्रेस बस्टर” की तरह बताया जाता है। लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह कहना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति का तनाव केवल पांच मिनट में खत्म हो जाएगा।

फिर भी छोटे सेशन के बाद कुछ लोगों को रिलैक्सेशन या एंग्जायटी में कमी महसूस हो सकती है। 2026 में प्रकाशित एक सिस्टमैटिक रिव्यू और नेटवर्क मेटा-एनालिसिस में क्लिनिकल ईएफटी पर 17 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स शामिल किए गए। साइकोलॉजिकल स्ट्रेस से जुड़ी स्टडीज में ईएफटी के बाद स्ट्रेस कम होने का प्रॉमिसिंग असर मिला। फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस में भी बेहतर परिणाम देखा गया।

इसलिए 5 मिनट की टैपिंग को तुरंत रिलैक्स करने वाली एक्सरसाइज के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन, इसे तनाव को दूर करने के स्थायी इलाज नहीं मानना चाहिए।

टैपिंग से तनाव कैसे कम हो सकता है?
एनसीबीआई के मुताबिक ईएफटी में केवल शरीर के पॉइंट्स पर टैपिंग करना ही शामिल नहीं होता। व्यक्ति को उस समय मौजूद तनावपूर्ण विचार या भावना पर ध्यान भी देना होता है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को प्रेजेंटेशन को लेकर एंग्जायटी है, तो वह उस एंग्जायटी को पहचानकर उसके बारे में एक छोटा स्टेटमेंट बोल सकता है और टैपिंग कर सकता है।

इस प्रक्रिया में इमोशनल एक्सपोजर और कॉग्निटिव रीफ्रेमिंग जैसे एलिमेंट्स शामिल हो सकते हैं। व्यक्ति असहज विचार को पूरी तरह से अनदेखा करने के बजाय उसको स्वीकार करता है।

ऐसे करें ईएफटी टैपिंग
तनाव और मूड के लिए टैपिंग तकनीक के फायदे
क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार अगर आप इसे सिर्फ़ रिलैक्सेशन या स्ट्रेस-मैनेजमेंट टेक्नीक के रूप में आजमाना चाहते हैं, तो बेसिक सीक्वेंस इस तरह रखा जा सकता है:

पहले प्रॉब्लम पहचानें – कुछ सेकंड के लिए सोचें कि आपको इस समय किस बात का टेंशन है। उदाहरण के लिए – “मुझे आज के काम को लेकर बहुत टेंशन महसूस हो रहा है।”

स्ट्रेस की इंटेंसिटी बताएं – अपनी टेंशन को 0 से 10 के स्केल पर रेट करें। 0 = बिल्कुल टेंशन नहीं और 10 = बहुत ज्यादा टेंशन होना। इसे आप बाद में देख सकते हैं कि एक्सरसाइज के बाद आपकी सब्जेक्टिव फीलिंग बदली या नहीं।

एक सिंपल स्टेटमेंट बोलें – किसी परेशान करने वाले विचार को स्वीकार करते हुए एक सरल वाक्य बोल सकते हैं। जैसे – “हालांकि मुझे अभी टेंशन महसूस हो रही है, मैं खुद को शांत करने की कोशिश कर रहा/रही हूं।”

धीमी टैपिंग करें – उंगलियों के टिप्स से हल्के-हल्के टैप करते हुए अपना ध्यान उसी फीलिंग पर रखें। ईएफटी करने की तकनीक में आमतौर पर चेहरे और अपर-बॉडी के आस-पास कई पॉइंट्स इस्तेमाल किए जाते हैं। टैपिंग बहुत तेज या जोर से नहीं करनी चाहिए। इसका मकसद चोट पहुंचाना नहीं है।

दोबारा इंटेंसिटी चेक करें – लगभग कुछ मिनट की प्रैक्टिस के बाद फिर से 0–10 स्केल पर अपनी स्ट्रेस इंटेंसिटी रेट करें। अगर आपको आराम महसूस हो तो यह टेक्नीक आपके लिए एक शॉर्ट रिलैक्सेशन रूटीन के रूप में उपयोगी हो सकती है।

टैपिंग तकनीक आज के समय में काफी लोकप्रिय है, इससे स्ट्रेस, तनाव दूर होने में मदद मिलती है और मानसिक शांति मिलती है। टैपिंग टेक्नीक अपनाने के बाद कुछ लोगों को शॉर्ट सेशन के बाद रिलैक्सेशन महसूस हो सकता है, जबकि दूसरों को ज्यादा स्ट्रक्चर्ड या प्रोफेशनल मदद की जरूरत हो सकती है। और अगर बात अस्थमा, क्रोनिक पेन, डिप्रेशन या किसी दूसरी बीमारी की है, तो ईएफटी को मेडिकल ट्रीटमेंट का ऑप्शन नहीं बनाना चाहिए।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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