धार्मिक

1 नवंबर को रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग, खरीदारी के लिए शुभ दिन

भोपाल
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर रविवार, एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुष्य नक्षत्र को समृद्धि, स्थायित्व और शुभ कार्यों की सफलता से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन सोना-चांदी, आभूषण, वाहन, जमीन, प्लॉट और मकान की खरीदारी के साथ नए कारोबार, स्टार्टअप और व्यावसायिक योजनाओं की शुरुआत भी शुभ मानी गई है। खास बात यह है कि पुष्य नक्षत्र पूरे दिन रहने से खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए दिनभर अवसर उपलब्ध रहेगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, रविवार और पुष्य नक्षत्र का संयोग रवि पुष्य योग का निर्माण करता है। पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों में विशेष शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस दिन सोना-चांदी, आभूषण, वाहन, बर्तन और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के साथ जमीन, प्लॉट और मकान में निवेश करना भी शुभ माना जाता है। रविवार और सप्तमी तिथि का संबंध सूर्यदेव से होने के कारण इस संयोग का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।

संपत्ति और दीर्घकालिक निवेश के लिए विशेष महत्व
इस विशेष दिन को लेकर कहना है कि रवि पुष्य नक्षत्र का संबंध स्थायित्व और समृद्धि की परंपरागत मान्यताओं से जुड़ा है। इसी वजह से इस दिन जमीन, प्लॉट और मकान की खरीदारी, संपत्ति की रजिस्ट्री तथा दीर्घकालिक निवेश से जुड़े निर्णयों को शुभ माना जाता है। शनि को स्थायित्व और दीर्घकालिक योजनाओं का कारक माना जाता है। ऐसे में पुष्य नक्षत्र के इस संयोग में लोग भविष्य की आर्थिक योजनाओं और संपत्ति अर्जित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

नए कारोबार और स्टार्टअप की शुरुआत का अवसर
दूसरी ओर भागवताचार्य ने बताया कि रवि पुष्य योग को व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन नए व्यापार और व्यवसाय की शुरुआत, प्रतिष्ठानों का शुभारंभ, बही-खातों की खरीदारी और नई व्यावसायिक योजनाओं का आरंभ किया जा सकता है। आधुनिक दौर में स्टार्टअप और नए उद्यम शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह दिन परंपरागत रूप से शुभ अवसर है।

उन्होंने बताया, इस बार शनि के मीन राशि में गोचर और गुरु की स्थिति को भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रहों की स्थिति इस दिन को खरीदारी, निवेश और शुभ कार्यों के लिए विशेष बना रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में शुरू किए गए कार्यों में स्थायित्व और निरंतर प्रगति की कामना की जाती है। इसी कारण व्यापारी वर्ग इस अवसर पर नए प्रतिष्ठान, मशीनरी, व्यावसायिक उपकरण और कारोबार से संबंधित जरूरी वस्तुओं की खरीदारी को प्राथमिकता देता है।

इसके साथ ही इस दिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान-पुण्य और आध्यात्मिक गतिविधियां भी की जा सकती हैं। सूर्यदेव की आराधना, विशेष पूजा और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी इस अवसर को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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