शिक्षा

बिहार के PG छात्रों के लिए नया नियम लागू, डिग्री पाने के लिए रिसर्च पेपर प्रकाशित कराना होगा अनिवार्य

 पटना
 राज्य के विश्वविद्यालयों में पीजी की पढ़ाई पूरी करने के लिए नया पाठ्यक्रम लागू किया गया है।

अब स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को रिसर्च पेपर प्रकाशित कराना होगा। इसके लिए उन्हें अकादमिक क्रेडिट के साथ 100 अंक दिए जाएंगे।

नई व्यवस्था एक वर्षीय और दो वर्षीय, दोनों तरह के पीजी पाठ्यक्रमों में लागू होगी। इसके लिए तैयार नया पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क शैक्षणिक सत्र 2027 से प्रभावी होगा।

इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के साथ शोध कार्य के लिए भी प्रोत्साहित करना है। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए पीजी के 46 विषयों का समान पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

दो वर्षीय पीजी के दूसरे वर्ष और एक वर्षीय पीजी का सिलेबस एक समान रखा गया है। दोनों की कक्षाएं भी समानांतर चलेंगी।

शोध के लिए विद्यार्थियों को मिलेंगे दो विकल्प
नई व्यवस्था के तहत दो वर्षीय पीजी के तीसरे सेमेस्टर और एक वर्षीय पीजी के पहले सेमेस्टर में विद्यार्थियों को दो विकल्प दिए जाएंगे। इनमें दूसरा विकल्प केवल शोध पर केंद्रित होगा।

शोध समूह चुनने वाले विद्यार्थियों को दो वर्षीय पीजी के चौथे सेमेस्टर और एक वर्षीय पीजी के दूसरे सेमेस्टर में रिसर्च पेपर प्रकाशित कराना होगा।

जर्नल में पेपर प्रकाशित करने पर 100 अंक और दो क्रेडिट
रिसर्च पेपर के प्रकाशन के लिए 100 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके लिए विद्यार्थियों को दो अकादमिक क्रेडिट मिलेंगे। शोध समूह चुनने वाले विद्यार्थियों के लिए केवल रिसर्च पेपर प्रकाशित कराना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें शोध प्रबंध (थीसिस या डिसर्टेशन), सेमिनार और वाइवा-वोस की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

दो वर्षीय पीजी के चौथे सेमेस्टर में इसके लिए अलग-अलग अंक और क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। शोध प्रबंध के लिए 300 अंक और 14 क्रेडिट, सेमिनार के लिए 100 अंक और चार क्रेडिट, जबकि वाइवा-वोस के लिए 100 अंक और दो क्रेडिट मिलेंगे। रिसर्च पेपर के 100 अंक और दो क्रेडिट को मिलाकर शोध समूह के कुल 22 क्रेडिट निर्धारित किया गया है।

कोर्स वर्क विद रिसर्च में भी थीसिस और प्रेजेंटेशन जरूरी
कोर्स वर्क विद रिसर्च विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को भी शोध से जुड़ी अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसके तहत डिसर्टेशन के लिए 400 अंक और 18 क्रेडिट निर्धारित हैं।

वहीं, रिसर्च सेमिनार या प्री-सबमिशन प्रेजेंटेशन के लिए 100 अंक और दो क्रेडिट तथा वाइवा-वोस के लिए 100 अंक और दो क्रेडिट मिलेंगे।

पटना विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रो. कामेश्वर पंडित ने बताया कि इस तरह नए पीजी फ्रेमवर्क में शोध कार्य को पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

एक वर्षीय और दो वर्षीय पीजी के दूसरे वर्ष के समकक्ष पाठ्यक्रमों को एक साथ संचालित करने की योजना है, ताकि दोनों व्यवस्थाओं में विद्यार्थियों की पढ़ाई और शोध संबंधी गतिविधियां समान रूप से आगे बढ़ सकें।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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