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आर्थिक बदहाली के बीच मूडीज ने खराब किया चीन का मूड, शेयर 5 साल के लो लेवल पर

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बीजिंग

आर्थिक मोर्चे पर कई चुनौतियों का सामना कर रहे चीन को मूडीज (Moody’s) ने तगड़ा झटका दिया है। इस रेटिंग एजेंसी ने चीन के क्रेडिट रेटिंग आउटलुक को स्टेबल से निगेटिव कर दिया है। प्रॉपर्टी सेक्टर के संकट और इसके कारण मीडियम टर्म में इकॉनमिक ग्रोथ प्रभावित होने की आशंका के कारण ऐसा किया गया है। चीन का रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से संकट से जूझ रहा है और अब इसने पूरी इकॉनमी को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। आउटलुक को डाउनग्रेड किए जाने से मूडीज के चीन की क्रेडिट रेटिंग को घटाने की आशंका बढ़ गई है। चीन के वित्त मंत्रालय ने कहा कि वह देश के क्रेडिट आउटलुक को डाउनग्रेड करने के मूडीज के फैसले से निराश है। बुधवार को चीन की ब्लू-चिप कंपनियों के स्टॉक पांच साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए। साथ ही देश की करेंसी युआन भी डॉलर के मुकाबले और गिर गई।

मूडीज का कहना है कि चीन नकदी से जूझ रही स्थानीय सरकारों और सरकारी कंपनियों को आर्थिक मदद दे सकता है। इससे चीन की फिस्कल, इकनॉमिक और इंस्टीट्यूशनल स्ट्रेंथ के लिए ब्रॉड डाउनसाइट रिस्क बढ़ गया है। रेटिंग एजेंसी ने ऐसे समय चीन के आउटलुक को डाउनग्रेड किया है जब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी कई तरह की आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही है। रियल एस्टेट के दम पर चीन ने कई दशक तक तेजी से विकास किया। लेकिन पिछले दो साल से अधिक समय से यह सेक्टर गहरे संकट से जूझ रहा है।

रियल एस्टेट संकट
चीन के रियल सेक्टर की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश की इकॉनमी में इसकी 30% हिस्सेदारी है। जानकारों का कहना है कि चीन की रियल एस्टेट संकट इतना गहरा है कि इससे उबरने में चीन को कई साल लग सकते हैं। साथ ही लोकल गवर्नमेंट का कर्ज भी चीन के लिए समस्या बन गया है। प्रॉपर्टी मार्केट में गिरावट के कारण मकानों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। इससे सरकार का रेवेन्यू बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कोरोना महामारी के दौर में लॉकडाउन ने भी चीन की इकॉनमी को बुरी तरह हिलाकर रख दिया है।

माना जा रहा है कि रियल एस्टेट का संकट चीन की इकॉनमी पर भारी पड़ सकता है। इसने दूसरे सेक्टर्स को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। खासकर तीन ट्रिलियन डॉलर की शेडो बैंकिंग इंडस्ट्री भी इससे प्रभावित होने लगी है। इसकी वजह यह है कि इस सेक्टर का रियल एस्टेट में बड़ा निवेश है। इतना ही नहीं चीन में आबादी घटने लगी है। देश का फर्टिलिटी रेट जापान से भी कम है। छह दशक में पहली बार चीन की आबादी पिछले साल घटी है।

बढ़ सकता है कर्ज
लेबर सप्लाई में गिरावट और हेल्थकेयर तथा सोशल खर्च बढ़ने से चीन का राजकोषीय घाटा और कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। वर्कफोर्स घटने से डोमेस्टिक सेविंग्स भी घट सकती है। इस कारण इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है और निवेश में कमी आ सकती है। मूडीज के मुताबिक चीन की सालाना ग्रोथ रेट 2024 और 2025 में घटकर चार परसेंट पर आ सकती है। इसके बाद 2026 से 2030 तक इसके औसतन 3.8 परसेंट रहने का अनुमान है। इस साल चीन की इकॉनमी के पांच परसेंट की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। मूडीज ने चीन के सॉवरेन बॉन्ड्स के लिए लॉन्ग टर्म A1 रेटिंग बरकरार रखी है।

Dinesh Purwar

Editor, Pramodan News

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