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भारत में बने मलेरिया वैक्सीन में है दम, WHO ने टीकों की लिस्ट में किया शामिल

नईदिल्ली

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मलेरिया रोग के खिलाफ लड़ाई में बच्चों के लिए एक नई वैक्सीन को इस्तेमाल में लाने की मंजूरी दी है। यह मलेरिया का दूसरा टीका है। अक्टूबर 2023 में मलेरिया के इलाज के लिए WHO की ओर से वैक्सीन, R21/ मैट्रिक्स-M मलेरिया वैक्सीन ( R21/ Matrix-M malaria vaccine) की सिफारिश की गई थी। R21 वैक्सीन, RTS, S/AS01 वैक्सीन के बाद WHO द्वारा प्रीक्वालिफ़ाइड की गई दूसरी मलेरिया वैक्सीन है। यह वैक्सीन ऑक्सफोर्ट यूनिवर्सिटी ने विकसित किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित की गई है। आरटीएस, एस/एएस01 वैक्सीन को पिछले साल मंजूरी दी गई थी।

इस वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि दूसरी वैक्सीन की कम क़ीमत और सरल सुलभता से बच्चों को जल्द सुरक्षा चक्र के दायरे में लाया जा सकेगा। बता दें कि मलेरिया जीवन के लिए घातक साबित होन सकने वाली एक बीमारी है। यह मच्छरों से मनुष्यों में फैलता है। हालांकि इसकी रोकथाम और इलाज संभव है। इसके मामूली लक्षणों में बुखार, कंपकंपी और सिरदर्द हैं, जबकि गम्भीर हालत होने पर सांस लेने में दिक़्कत, दौरे, थकान समेत अन्य लक्षण देखे जाते हैं। R21/Matrix-M नामक वैक्सीन मलेरिया पर पार पाने के लिए यह दूसरी वैक्सीन हैं।

प्रीक्वालिफाइड वैक्सीन होने का क्या मतलब है?

WHO की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यदि किसी वैक्सीन का प्रासंगिक डेटा का गहन मूल्यांकन, नमूनों का परीक्षण और प्रासंगिक विनिर्माण साइटों का WHO निरीक्षण किया गया है और रिजल्ट पॉजिटिव है तो इसे प्रीक्वालिफाइड वैक्सीन की सूची में शामिल किया जाता है।

मलेरिया मुक्त जीवन की संकल्पना

डब्ल्यूएचओ के टीकाकरण, टीके और जैविक विभाग के निदेशक डॉ. केट ओ'ब्रायन ने कहा, 'R21 वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाया गया है। आज वैश्विक स्वास्थ्य में एक बड़ी प्रगति का प्रतीक है क्योंकि हम मलेरिया स्थानिक क्षेत्रों में बच्चों के लिए अनुशंसित दूसरी मलेरिया वैक्सीन आर 21/मैट्रिक्स-एम की प्रीक्वालिफिकेशन का स्वागत करते हैं। यह उपलब्धि मलेरिया को खत्म करने के लिए हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाता है। जो हमारे बच्चों का दुश्मन बना हुआ है। हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मलेरिया मुक्त की खोज में एकजुट हैं भविष्य, जहां हर जीवन इस बीमारी के खतरे से सुरक्षित है।'

2022 में, वैश्विक स्तर पर मलेरिया से कुल 608,000 मौतें दर्ज की गईं

अफ्रीकी क्षेत्र में बच्चों पर खास तौर पर यह असर डालती है। यहां हर साल करीब 5 लाख बच्चे इस बीमारी से मर जाते हैं। विश्व स्तर पर, 2022 में, 85 देशों में अनुमानित 249 मिलियन मलेरिया के मामले और 608,000 मलेरिया से मौतें हुईं।मलेरिया एक जानलेवा संक्रामक रोग है जो प्लास्मोडियम परजीवियों के कारण होता है जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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