राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

पूर्णिया से चुनाव मैदान में निर्दलीय उतर गए पप्पू यादव, किया नामांकन…

पटना

पप्पू यादव बार-बार यह कह रहे थे कि दुनिया छोड़ देंगे लेकिन पूर्णिया नहीं छोड़ देंगे. महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से बीमा भारती के पर्चा भरने के बाद भी पप्पू यादव ने लालू यादव से गुहार लगाते हुए कहा था कि मैं लालटेन सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार हूं. पप्पू यादव की गुहार काम नहीं आई. आरजेडी उम्मीदवार बीमा भारती के बाद अब पप्पू यादव भी पूर्णिया सीट से मैदान में उतर गए हैं.

पप्पू यादव ने नामांकन के अंतिम दिन पूर्णिया कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. पप्पू यादव ने कांग्रेस के जयकारे लगाए, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आशीर्वाद का भी दावा किया लेकिन नामांकन बतौर निर्दलीय उम्मीदवार किया. पप्पू यादव के मैदान में आ जाने से पूर्णिया की लड़ाई अब त्रिकोणीय हो गई है.

पप्पू यादव के नामांकन को लेकर कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. कांग्रेस सूत्रों की मानें तो पप्पू यादव ने दिल्ली पहुंचकर पवन खेड़ा की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने, अपनी पार्टी के विलय का ऐलान कर दिया था लेकिन तकनीकी रूप से अभी तक ऐसा हुआ नहीं था.

 

पिछली बार बिहार में एनडीए ने महागठबंधन का सूपड़ा साफ कर दिया था।

इस बार भी एनडीए बिहार में 40 में से 40 सीटों पर चुनाव जीतने की तैयारी कर रही है। महागठबंधन का दावा है कि बिहार में इस बार एनडीए की राह आसान नहीं होने वाली है। इस बीच प्रदेश में कई ऐसे बड़े चेहरे भी हैं जिन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

आज के दौर में खासकर लोकसभा चुनाव में पार्टी सिंबल ही जीत की सबसे बड़ी वजह मानी जाती है। बिहार में उम्मीदवार की छवि बहुत अच्छी न हो या वह ज्यादा लोकप्रिय भी न हो यदि उसे बड़े दलों का टिकट मिल जाता है तो ऐसा माना जाता है कि उसने आधी लड़ाई जीत ली है।

लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। इस बार बिहार में कई ऐसे चेहरे मैदान में उतर गए हैं या उतरने वाले हैं जिन्हें जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर ये उम्मीदवार नहीं भी जीतते हैं तो ये अपनी सीट का समीकरण बिगाड़ जरूर सकते हैं। आईये जानते हैं वे बड़े चेहरे हैं जो बड़ी पार्टियों का गेम प्लान खराब कर सकते हैं…

 

पप्पू यादव- पूर्णिया

पप्पू यादव के कांग्रेस में जाने के बाद ये लगभग तय हो गया था कि वे पूर्णिया लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं। लेकिन लालू यादव ने उनका प्लान खराब कर दिया। पप्पू यादव को उम्मीद थी कि अंत-अंततक उन्हें फ्रेंडली फाइट लड़ने की अनुमति दी जाएगी मगर कांग्रेस ने उन्हें सिंबल नहीं दिया। अब पप्पू ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है। आज वे नामांकन भर रहे हैं।

सीमांचल में पप्पू यादव की क्या हैसियत है ये किसी से छिपी नहीं है। खासकर पूर्णिया सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला पप्पू यादव ने बहुत ही सोच-समझकर लिया है क्योंकि यहां के समीकरण उनके पक्ष में हैं। पूर्णिया में वह तीन बार सांसदी का चुनाव जीत चुके हैं।

पहली बार 1991 के लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पूर्णिया से जीते थे। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव यानी कि 1996 में भी वे यूपी की पार्टी सपा के टिकट पर चुनाव जीत गए थे। 1999 के चुनाव में पप्पू यादव फिर से पूर्णिया सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे और तीसरी बार सांसद बनने में सफल रहे। जाहिर है कि पप्पू यादव के चुनावी मैदान में उतरने से पूर्णिया का मुकाबला काफी दिलचस्प होने जा रहा है।

 

हिना शहाब- सीवान

बिहार के सीवान में खासा प्रभाव रखने वाले शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब एक बार फिर से चुनाव लड़ती दिखाई देने वाली हैं। वो इस बार सीवान से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। बता दें कि जब तक मोहम्मद शहाबुद्दीन जीवित थे, तब तक राजद ने हिना को सिवान से टिकट देकर चुनाव लड़ाया, लेकिन पति की मौत के बाद से आरजेडी ने शहाबुद्दीन परिवार से नजर फेर ली है।

यही वजह है कि हिना शहाब निर्दलीय ही चुनाव लड़ने जा रही हैं। हालांकि हिना शहाब भले ही पिछले तीनों चुनाव हार चुकी हैं मगर उनके मरहूम पति शहाबुद्दीन यहां पर चार बार सांसद रह चुके हैं। इस बार ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने हिना शहाब का समर्थन करने का ऐलान किया है। हिना शिहाब के बारे में कहा जा रहा है कि इस बार उन्हें पति की मृत्यु के बाद सहानुभूति के रूप में मुस्लिमों का अच्छा वोट मिल सकता है। ऐसे में हिना शहाब बीजेपी की राह आसान कर सकती हैं।

ललन सिंह- मुंगेर

मुंगेर लोकसभा से मोकामा के नलिनी रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में है। वे यहां पर एनडीए गठबंधन से जदयू उम्मीदवार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और राजद के बाहुबली अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को टक्कर देते हुए दिखाई देंगे।

बाहुबली ललन सिंह पहले जदयू से जुड़े थे लेकिन साल 2022 में बीजेपी से जुड़ गए थे। तब बिहार विधानसभा उप चुनाव में भाजपा ने उनकी पत्नी सोनम देवी को मोकामा से उम्मीदवार बनाया था। एक और भूमिहार ललन सिंह के यहां पर निर्दलीय उतरने से इस बार लड़ाई त्रिकोणीय बन गई है।

आशुतोष- जहानाबाद

जहानाबाद सीट इस बार भी जेडीयू को मिली है। 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी पार्टी ने चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी के प्रति अपना भरोसा जताया है। आरजेडी ने यहां से सुरेंद्र यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है। जहानाबाद लोकसभा सीट पर भूमिहार आबादी काफी मुखर रही है। लेकिन दोनों ही प्रमुख पार्टियों की तरफ से एक भी भूमिहार नेता को अवसर न दिए जाने से भूमिहार समाज के कुछ नेता नाराज बताए जा रहे हैं।

आशुतोष कुमार भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के अध्यक्ष हैं और राष्ट्रीय जन जन पार्टी के संस्थापक हैं। उन्होंने कहा कि राजद और जदयू दोनों पार्टी द्वारा बाहरी लोगों को टिकट देकर इस संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं को अपमानित करने का काम किया है इसलिए वो चुनाव लड़ेंगे। हालांकि वे अपनी पार्टी से चुनाव लड़ेंगे।

इसके अलावा इस सीट से पूर्व सांसद अरूण कुमार के भी चुनाव लड़ने की उम्मीद की जा रही है। अरुण कुमार एक वक्त में उपेन्द्र कुशवाह के करीब थे। उनकी पार्टी रालोजद जो कि अब खत्म हो गई है, के टिकट पर वे जहानाबाद से जीते थे। जहानाबाद से दो बार सांसद रह चुके डॉ. अरुण कुमार इस बार बसपा से चुनाव लड़ सकते हैं। जाहिर है चार बड़े चेहरों के मैदान में उतरने से जहानाबाद का चुनाव भी दिलचस्प होने जा रहा है।

पवन सिंह के बाद बिहार में एक और भोजपुरी गायक ने ठोका दावा, चिराग पासवान की पार्टी से लड़ सकते हैं चुनावपवन सिंह के बाद बिहार में एक और भोजपुरी गायक ने ठोका दावा, चिराग पासवान की पार्टी से लड़ सकते हैं चुनाव

गुंजन सिंह-नवादा

भोजपुरी सुपरस्टार गुंजन सिंह भी इस बार चुनावी मैदान में अपना दम दिखाने को तैयार हैं। नवादा लोकसभा का टिकट पाने के लिए गुंजन सिंह ने लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान से संपर्क किया था लेकिन इस बार ये सीट बीजेपी के खाते में चली गई है। बीजेपी ने नवादा से विवेक ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। वहीं आरजेडी ने श्रवण कुशवाहा को टिकट दिया है।

विवेक ठाकुर भूमिहार जाति के हैं और बीजेपी के दिग्गज नेता डॉ. सी.पी. ठाकुर के पुत्र हैं। माना जा रहा है कि भूमिहार के सामने कुशवाहा को उतार कर लालू ने एनडीए को टक्कर देने की भले कोशिश की है, लेकिन इस चक्कर में उनके कुनबे के लोग यानी यादव ही उनके विरोध में उतर आये हैं। आरजेडी के बागी उम्मीदवार विनोद यादव भी मैदान में उतर गए हैं।

वहीं गुंजन सिंह के जिले नवादा में उनकी अच्छी फैन फॉलोइंग है। इस चुनाव में उनका साथ चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप भी दे रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि गुंजन सिंह दो बड़ी पार्टियों को कितनी टक्कर दे पाते हैं…

Dinesh Purwar

Editor, Pramodan News

Dinesh Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button