व्यापार जगत

अप्रैल में यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री 1.3 प्रतिशत बढ़कर 3,35,629 इकाई के रिकॉर्ड स्तर पर

अप्रैल में यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री 1.3 प्रतिशत बढ़कर 3,35,629 इकाई के रिकॉर्ड स्तर पर

हर्ष बवेजा आरईसी लि. के निदेशक-वित्त का कार्यभार संभाला

थोक मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 13 महीने के उच्चस्तर 1.26 प्रतिशत पर

नई दिल्ली
भारत में यूटिलिटी वाहनों की मजबूत मांग के दम पर अप्रैल में यात्री वाहनों की थोक बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, यात्री वाहनों की थोक बिक्री अप्रैल में सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत बढ़कर 3,35,629 इकाई हो गई। अप्रैल, 2023 में यह 3,31,278 इकाई थी।

यूटिलिटी वाहनों की बिक्री पिछले महीने 1,79,329 इकाई रही, जो अप्रैल, 2023 की 1,48,005 इकाई से 21 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, यात्री कारों की बिक्री 23 प्रतिशत घटकर 96,357 इकाई रह गई, जो अप्रैल, 2023 में 1,25,758 इकाई थी। पिछले महीने वैन की बिक्री 15 प्रतिशत बढ़कर 12,060 इकाई हो गई, जो अप्रैल, 2023 में 10,508 इकाई थी।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री 31 प्रतिशत बढ़कर 17,51,393 इकाई हो गई, जबकि अप्रैल, 2023 में यह 13,38,588 इकाई थी।

मोटरसाइकिल बिक्री 34 प्रतिशत बढ़कर 11,28,192 इकाई रही जो अप्रैल, 2023 में 8,39,274 इकाई थी। स्कूटर की थोक बिक्री सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर 5,81,277 इकाई हो गई जबकि पिछले साल अप्रैल में यह 4,64,389 इकाई थी।

तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री पिछले महीने 14.5 प्रतिशत बढ़कर 49,116 इकाई हो गई, जबकि अप्रैल 2023 में यह 42,885 इकाई थी।

सियाम के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत मोटर वाहन उद्योग के लिए काफी अच्छी रही है। सभी खंडों ने अप्रैल, 2023 की तुलना में अप्रैल, 2024 में वृद्धि दर्ज की है।

उन्होंने कहा, ‘‘मानसून में सामान्य से अधिक बारिश, चुनाव के बाद नीति की निरंतरता और विनिर्माण व बुनियादी ढांचे पर सरकार का जोर समग्र आर्थिक वृद्धि को गति देगा। इससे मोटर वाहन क्षेत्र की वृद्धि जारी रखने में मदद मिलेगी।’’

 

हर्ष बवेजा आरईसी लि. के निदेशक-वित्त का कार्यभार संभाला

नई दिल्ली
 सार्वजनिक क्षेत्र की आरईसी लि. ने कहा कि हर्ष बवेजा ने कंपनी के निदेशक (वित्त) का पदभार संभाल लिया है। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 10 मई को उनकी नियुक्ति की मंजूरी दी थी।

बिजली मंत्रालय के तहत आने वाली आरईसी ने बयान में कहा, ‘‘हर्ष बवेजा ने कंपनी के निदेशक (वित्त) का पदभार संभाल लिया है।’’

बवेजा की नियुक्ति लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) की सिफारिश के बाद की गई है। यह नियुक्ति 11 उम्मीदवारों की गहन चयन प्रक्रिया के बाद की गई।

चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ-साथ बवेजा के पास कई संस्थानों में वित्तीय एवं व्यावसायिक कार्यों के प्रबंधन के क्षेत्र में 33 साल से अधिक का अनुभव है।

निदेशक पद पर नियुक्ति से पहले वह आरईसी में कार्यकारी निदेशक थे।

 

 

थोक मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 13 महीने के उच्चस्तर 1.26 प्रतिशत पर

नई दिल्ली
अप्रैल में थोक मुद्रास्फीति लगातार दूसरे महीने बढ़कर 13 महीने के उच्चस्तर 1.26 प्रतिशत पर पहुंच गई है। ईंधन और बिजली के साथ-साथ खाद्य पदार्थों खासकर सब्जियों के दाम बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति बढ़ी है।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में लगातार दो महीने से बढ़ोतरी जारी है। फरवरी में यह 0.20 प्रतिशत थी जो मार्च में बढ़कर 0.53 प्रतिशत हो गई। अप्रैल, 2023 में यह 0.79 प्रतिशत थी।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में 13 महीने के उच्चतम स्तर पर रही। मार्च, 2023 में यह 1.41 प्रतिशत के उच्चस्तर पर थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने  बयान में कहा, ‘‘अप्रैल, 2024 में खाद्य वस्तुओं, बिजली, कच्चे पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस, खाद्य उत्पाद विनिर्माण, अन्य विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों के दाम बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति बढ़ी है।’’

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 6.88 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में मुद्रास्फीति अप्रैल में 1.38 प्रतिशत रही, जो मार्च में शून्य से 0.77 प्रतिशत नीचे थी।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति वैश्विक जिंस कीमतों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जिसमें साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है।

नायर ने कहा, ‘‘ पिछले कुछ महीनों में कई जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसमें कच्चे तेल की कीमतें भी शामिल हैं जो अप्रैल में बढ़ीं। अभी तक जिंस कीमतों का रुख देखते हुए डब्ल्यूपीआई के मई और जून में दो प्रतिशत के पार जाने का अनुमान है।’’

इक्रा ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए औसत थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

सब्जियों की महंगाई दर 23.60 प्रतिशत रही, जो मार्च में 19.52 प्रतिशत थी। आलू की महंगाई दर मार्च के 52.96 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 71.97 प्रतिशत हो गई। प्याज में यह 59.75 प्रतिशत रही जबकि मार्च में यह 56.99 प्रतिशत थी।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा, ‘‘ भविष्य में सितंबर/अक्टूबर, 2024 तक खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति में नरमी आने की उम्मीद है क्योंकि कई खरीफ फसलें मंडियों में आना शुरू करेंगी और मौजूदा आपूर्ति की स्थिति सुधरेगी।’’

आंकड़ों के अनुसार, विनिर्मित उत्पादों में अप्रैल में महंगाई दर में कमी आई और यह 0.42 प्रतिशत रही। मार्च में यह 0.85 प्रतिशत थी।

अप्रैल में थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि इस महीने के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के उलट है। आरबीआई मौद्रिक नीति बनाते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है।

अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 11 महीने के निचले स्तर 4.83 प्रतिशत पर आ गई।

आरबीआई ने पिछले महीने लगातार सातवीं बार नीतिगत ब्याज दर रेपो को यथावत रखा था।

आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति की बैठक पांच से सात जून को होनी है।

Dinesh Purwar

Editor, Pramodan News

Dinesh Purwar

Editor, Pramodan News

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