राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

JPSC घोटाले में बड़ी कार्रवाई, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता निलंबित; जांच का दायरा बढ़ा

रांची.

झारखंड लोक सेवा आयोग की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के निलंबन का आदेश कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने जारी कर दिया है। उन्हें विगत 22 जुलाई को अपराध अनुसंधान विभाग की ओर से गिरफ्तार किया गया था।

कांड संख्या-16/2026 की प्राथमिक अभियुक्त श्वेता कुमारी गुप्ता, उप परीक्षा नियंत्रक, झारखंड लोक सेवा आयोग गिरफ्तारी के बाद से ही हिरासत में हैं। उन्हें झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के तहत हिरासत में लिए जाने की तिथि यानि की 22 जुलाई के प्रभाव से अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है। श्वेता कुमारी गुप्ता को निलंबन अवधि के दौरान जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान उसी स्थापना द्वारा किया जाएगा, जहां वह कारावास में जाते समय पदस्थापित थीं। जारी आदेश के अनुसार हिरासत से मुक्त होने के बाद श्वेता गुप्ता कार्मिक, प्रसासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में योगदान देंगी। श्वेता गुप्ता की ओर से जमानत याचिका भी सीआईडी कोर्ट में दाखिल की गई है।

टीडीपीएल की कार्यप्रणाली और जांच के दायरे में आई अन्य नियुक्तियां
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) नियुक्ति घोटाले में सामने आ रहे नए तथ्य यह बताते हैं कि गड़बड़ी का यह दायरा सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार गहरी प्रशासनिक और संस्थागत व्यवस्थाओं से जुड़े हुए हैं। सीआईडी की अब तक की तफ्तीश में यह बात प्रमुखता से उभरी है कि परीक्षा आयोजन से जुड़े निजी और गोपनीय अनुबंधों में किस तरह से सेंध लगाई गई थी। इस पूरे प्रकरण में टीडीपीएल ्नामक एजेंसी की भूमिका सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में है। एजेंसी द्वारा जितनी भी परीक्षाओं के संचालन का जिम्मा लिया गया था, उनमें प्रश्न पत्र लीक होने से लेकर ओएमआर शीट में हेरफेर करने तक के गंभीर संकेत मिले हैं। बिचौलियों और परीक्षा से जुड़े जिम्मेदारों की मिलीभगत से एक संगठित गिरोह संचालित हो रहा था, जो हर पद के लिए एक निश्चित सौदा तय करता था। इस हाई-प्रोफाइल जांच के अब उन अन्य कड़ियों तक भी पहुंचने की उम्मीद है, जो इस पूरे सिस्टम में पर्दे के पीछे रहकर फायदा उठा रहे थे। सीआईडी द्वारा अदालत में 6 बैगों में पेश किए गए दस्तावेज इस बात का प्रमाण हैं कि जांच का दायरा अब डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेन-देन और कॉल डिटेल्स के आधार पर आगे बढ़ चुका है, जिससे आनेवाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

कार्मिक ने तत्कालीन बीडीओ को आरोप मुक्त किया
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने मांडू के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी जागो महतो को निलंबन मुक्त करने का आदेश देते हुए इससे संबंधित संकल्प जारी कर दिया है। संकल्प के अनुसार लोकायुक्त के पास की गई शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी लेकिन विभागीय जांच में उनपर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद विभाग ने आरोप वापस लेते हुए उन्हें निलंबन मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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