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सिंधिया राजघराना संपत्ति विवाद: अब 4 नवंबर को होगी सुनवाई, प्रतिमा देवी के बयान टले

 ग्वालियर
देश के बड़े राजघरानों में शामिल मध्यप्रदेश के ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) कानूनी अड़चनों में फंस गया है। गुरुवार (29 अक्टूबर 2026) को ग्वालियर में अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति लगाने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पदमाराजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होने थे लेकिन जज के छुट्टी पर होने के कारण सुनवाई टल गई और अब 4 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

प्रतिमा देवी ने अपने हक के लिए खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने सिंधिया राजघराने की संपत्ति में अपने हिस्से के लिए सिविल वाद दायर किया था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर राजीनामा अदालत में पेश किया गया। मूल वाद में पद्मावती राजे की दोनों बेटियों प्रतिमा देवी राणा और कनिका देवी सिंह को पक्षकार बनाया गया था, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उन्हें एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया था। इसके बाद प्रतिमा देवी राणा ने अदालत में आवेदन देकर कहा है कि उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए और संपत्ति में अपने वैधानिक अधिकार पर विचार किया जाए। इतना ही नहीं प्रतिमा देवी ने ये भी आरोप लगाया है कि समझौता प्रस्ताव पर सहमति के हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए गए हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी हैं प्रतिमा देवी
प्रतिमा देवी राणा केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं। पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के राज परिवार में हुआ था। उनकी दो बेटियां प्रतिमा देवी राणा और कनिका देवी सिंह हैं। सिंधिया राजघराने की संपत्ति के बंटवारे के आपसी सहमति से तैयार संपत्ति समझौते में इन दोनों को शामिल नहीं किए जाने पर प्रतिमा देवी ने आपत्ति दर्ज कराई थी।

राजमाता के समय से चल रहा संपत्ति विवाद
दरअसल सिंधिया राजपरिवार के बीच राजमाता के समय से संपत्ति विवाद चल रहा है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया की बुआओं ने संपत्ति पर अपना अधिकार जताया है, जबकि सिंधिया का विरोध है कि उनके यहां राजा की गद्दी का कानून चलता है और संपत्ति पर राजा का अधिकार रहता है। इसके चलते बंटवारे के विवाद जिला न्यायालय में पहुंचा। ऊषा राजे, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे ने वर्ष 2010 में संपत्ति के विवाद को लेकर न्यायालय में एक वाद पत्र पेश किया। उनकी ओर से कहा गया कि पिता की संपत्ति में बेटियों का बराबर का हक है, इसलिए उन्हें भी संपत्ति में हिस्सा दिया जाए। एक अन्य वाद पत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी बुआओं के खिलाफ पेश किया है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

महल की ये कोठियां और संपत्ति समझौते के दायरे में..

    जय विलास पैलेस 12.40 लाख वर्गफीट में फैला है। जय विलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, छोटी विश्रांति, रानी महल शामिल हैं।

    स्वतंत्रता के समय सिंधिया परिवार के पास 100 से अधिक कंपनियों में शेयर थे। ग्वालियर में विशाल जय विलास पैलेस परिसर। शिवपुरी में माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल जैसी संपत्तियां हैं। उज्जैन में कालियादेह पैलेस भी है। दिल्ली में, परिवार के पास ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड पर एक प्लॉट और सिंधिया विला है। पुणे में पद्म विलास पैलेस, वाराणसी में सिंधिया घाट और गोवा में विठोबा मंदिर आदि संपत्तियां है।

    कई जिलों में कृषि भूमि, शहरी भूखंड, ट्रस्ट और अन्य परिसंपत्तियां भी बताई जाती हैं। स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार, अधिग्रहण और विभाजन के कारण इन संपत्तियों का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है।

    ग्वालियर रियासत ब्रिटिश काल की सबसे बड़ी और समृद्ध रियासतों में गिनी जाती थी।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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