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गैस किल्लत, गाजियाबाद में 400 रुपये किलो तक पहुंची एलपीजी और पलायन को मजबूर श्रमिक

 गाजियाबाद

गैस किल्लत दूर करने के लिए प्रशासन एजेंसियों में छोटे सिलिंडर पहुंचाने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत ठीक उलट है। इस कारण जिले में रह रहे चार लाख से ज्यादा श्रमिकों, छात्र-छात्राओं और किरायेदारों के सामने इन दिनों घरेलू गैस का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

स्थिति यह है कि लोगों को बाहर से 400 रुपये प्रति किलो तक गैस खरीदकर खाना पकाना पड़ रहा है। 700 रुपये दिहाड़ी कमाने वाले मजदूरों के लिए इतनी महंगी गैस खरीदना संभव नहीं है। इसके चलते उनके सामने पलायन की नौबत आ गई है।

कुटी रोड स्थित गंगा विहार कॉलोनी में साथी छोटेलाल के साथ रहने वाले कुशीनगर के बाबूलाल बताते हैं कि एक माह से हालात बेहद खराब हैं। दोनों घरों में रंगाई-पुताई करके
परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

 बाबूलाल के मुताबिक, पहले पांच किलो वाला घरेलू गैस सिलिंडर 110 रुपये प्रति किलो में भर जाता था। अब गैस का भाव 400 रुपये प्रति किलो हो गया है। उन्होंने बताया कि एक किलो गैस दो दिन भी नहीं चलती, जबकि एक दिन की दिहाड़ी 700 रुपये मिलती है।
 
एजेंसियों पर पांच किलो वाला सिलिंडर मिल नहीं रहा है। ऐसे में गांव लौटने का ही विकल्प बचा है। इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने बताया कि एजेंसी संचालकों से इस संबंध में वार्ता की गई है।

कालाबाजारी के लिए कैसे मिल रही गैस
जिले में छोटे-बड़े डेढ़ लाख से ज्यादा उद्योग संचालित हैं। इनमें बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। इसके अलावा 50 हजार के करीब छात्र, किरायेदार भी हैं। इनके पास गैस कनेक्शन नहीं है।
बीते दिनों अधिकारियों ने पांच किलो का सिलिंडर आसानी से उपलब्ध होने का दावा किया तो इन लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन जमीनी स्थिति विपरीत है। नंदग्राम में किराये पर रहने वाले कपिल ने बताया कि एजेंसियों पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में

कालाबाजारी करने वालों को गैस कैसे मिल रही है।
 गोदाम पर लटका ताला सिलिंडर के लिए कतार
सिलिंडर के लिए लोग घंटों लाइन में लगकर बैरंग लौट रहे हैं। हैप्पी होम गैस एजेंसी के गोदाम पर मंगलवार सुबह से ताला लगा रहा। लोग सिलिंडर के लिए घंटों लाइन में लगे रहे और बाद में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
 
आदर्शनगर कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि सिलिंडर लेने के लिए सुबह छह बजे ही गोदाम पर पहुंच गए थे। चौकीदार ने बताया कि दो दिन से गैस सिलिंडर का ट्रक नहीं आया है। लगभग तीन घंटे इंतजार करने के बाद घर लौट गए। अन्य उपभोक्ता भी इसी तरह परेशान हुए।
 
पांच किलो में कॉमर्शियल सिलिंडर है, घरेलू नहीं
नेहरूनगर स्थित कमला गैस एजेंसी में मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे तीन श्रमिक रोजी, मोहन व सुनील पांच किलो का घरेलू सिलिंडर लेने गए तो निराशा हाथ लगी। उनको बताया गया कि पांच किलो का कॉमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध है, लेकिन पांच किलो में घरेलू सिलिंडर नहीं पहुंचा है।

 पांच किलो का घरेलू सिलिंडर 344 रुपये, जबकि कॉमर्शियल की कीमत 649 रुपये है। ऐसे में कॉमर्शियल सिलिंडर ले पाना सबके बस की बात नहीं है। इसी तरह मसूरी स्थित चौधरी इंडेन गैस एजेंसी में भी पांच किलो का सिलिंडर लेने पहुंचे 8-10 श्रमिकों को

कर्मचारियों ने खाली हाथ लौटा दिया।
डासना स्थित इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि उनके यहां बेहद कम संख्या में पांच किलो के सिलिंडर आए हैं, इसलिए अधिकांश लोगों को बैरंग लौटाना पड़ रहा है।

एजेंसी संचालकों पर लगाया कालाबाजारी का आरोप
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि मुरादनगर के महाजनान मोहल्ला स्थित नमन गैस एजेंसी और मेन रोड स्थित भारत गैस एजेंसी में कालाबाजारी की जा रही है। इस मौके मनोज नागर, प्रमोद त्यागी, शील कुमार त्यागी, रिंकू प्रधान, सलीम अली, जान मोहम्मद, बाली त्यागी आदि अनेक लोग मौजूद रहे।
 

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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