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बस्तर रेल मार्ग पर लैंडस्लाइड का खतरा, सुरक्षा के लिए ट्रेनों की स्पीड कम

दंतेवाड़ा.

लगातार हो रही बारिश ने अब देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल लाइनों में शामिल किरंदुल-कोत्तावालसा (केके) रेल मार्ग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अरकू घाट सहित कई संवेदनशील घाट सेक्शन में भूस्खलन और पहाड़ियों से पत्थर गिरने का खतरा बढ़ गया है.

इसी जोखिम को देखते हुए रेलवे ने यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों की गति 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा तक सीमित कर दी है. लोको पायलटों को संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और लगातार हॉर्न बजाने के निर्देश दिए गए हैं. रेलवे इंजीनियरिंग विभाग की टीमें लगातार ट्रैक निरीक्षण में जुटी हुई हैं. संवेदनशील क्षेत्रों में गैंगमैन और ट्रैकमैन की अतिरिक्त तैनाती की गई है. जरूरत पड़ने पर मलबा हटाने के लिए विशेष दल भी अलर्ट मोड पर रखे गए हैं. मानसून के दौरान इस रेल लाइन पर पहले भी कई बार चट्टानें और मलबा गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं. समय रहते कार्रवाई होने से बड़ी दुर्घटनाएं टलती रही हैं.

यह रेल मार्ग केवल यात्री परिवहन ही नहीं बल्कि बैलाडीला के लौह अयस्क परिवहन की भी महत्वपूर्ण कड़ी है. ऐसे में किसी भी बाधा का असर औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है. रेलवे ने स्पष्ट किया है कि बारिश का दौर जारी रहने तक घाट सेक्शन में विशेष निगरानी और नियंत्रित गति से ही ट्रेनों का संचालन किया जाएगा.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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