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कोर्ट जाने की तैयारी में पिछड़ा वर्ग विकास मोर्चा

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भोपाल

ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने का मामला भले ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हो, लेकिन इसका प्रभाव भर्ती प्रक्रिया में भी देखने को साफ तौर पर मिल रहा है। प्रदेश के18 मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति को लेकर सीधी भर्ती पिछले दिनों  चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किया था। जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 12 पद, एससी के लिए 3 और एसटी के लिए 3 पद आरक्षित हैं। जबकि ओबीसी के लिए एक भी पद आरक्षित नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि मई वर्ष 2023 में डीन पद के लिए जब विभाग ने विज्ञापन जारी किया था उस समय ओबीसी के लिए 3 पद आरक्षित रखा गया था।  लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई। मेडिकल कॉलेजों में अभी डीन की नियुक्ति शुरू होने से पहले ही सीधी भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई हैं। मेडिकल कॉलेज से जुड़े प्रोफेसर्स  ने भर्ती प्रक्रिया को  कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज से जुड़े टीचरों का कहना हैं कि इससे पहले डीन की नियुक्ति प्रमोशन के तहत होती थी, जिसमें वरिष्ठ प्रोफेसरों का पूरा ध्यान रखा जाता था।

अगर सीधी भर्ती प्रक्रिया के तहत मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति हो रही हैं तो उसमें ओबीसी के लिए कुछ पद निर्धारित होना चाहिए। पिछड़ा वर्ग विकास मोर्चा ने इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र सिंह ने बताया कि आरक्षण अधिनियम 1984 के  तहत अगर भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी के  लिए कोई पद निर्धारित नहीं किया गया तो यह सीधे तौर पर आरक्षण प्रक्रिया का उल्लघंन है।  

मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रमोशन के जरिए होती थी। जिसमें वरिष्ठ प्रोफेसरों को डीन बनने का अवसर मिलता था। लेकिन सीधी भर्ती होने से वरिष्ठ प्रोफेसर डीन बनने से चूक जाएंगे।
डॉ. राकेश मालवीय, प्रांतीय सचिव, मेडिकल टीचर्स एसो.

Dinesh Purwar

Editor, Pramodan News

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